डोंगरगढ़ में अद्भुत नजारा: जब पटरियों पर उतरीं हजारों ज्योत कलश वाली महिलाएं, खैरागढ़ राजपरिवार की वो एक शर्त जो आज भी मानती है रेलवे

डोंगरगढ़। चैत्र नवरात्र 2026 के समापन पर आस्था नगरी डोंगरगढ़ भक्ति और परंपरा के रंग में सराबोर नजर आई। मां बम्लेश्वरी मंदिर से निकली ज्योति विसर्जन शोभायात्रा पूरे शहर से होते हुए महावीर तालाब पहुंची, जहां हजारों ज्योति कलशों का विधि-विधान के साथ विसर्जन किया गया।
नवरात्र के नौ दिनों तक पूजित ज्योति कलश को सिर पर धारण किए सैकड़ों महिलाएं जैसे ही नीचे स्थित मां बम्लेश्वरी मंदिर से निकलीं, पूरा शहर भक्ति में डूब गया। ढोल-नगाड़ों की गूंज, देवी गीतों और जयकारों के बीच शोभायात्रा आगे बढ़ती रही।
इस दौरान सबसे खास दृश्य तब देखने को मिला, जब शोभायात्रा मुंबई–हावड़ा मुख्य रेल मार्ग को पार करने पहुंची। आस्था के सम्मान में रेलवे द्वारा मेगा ब्लॉक लगाया गया, जिससे दोनों ओर से आने वाली ट्रेनों को कुछ समय के लिए रोक दिया गया और रेल पटरियों पर सन्नाटा छा गया।
स्थानीय मान्यता के अनुसार यह परंपरा अंग्रेजों के समय से चली आ रही है। बताया जाता है कि खैरागढ़ राजपरिवार ने रेलवे लाइन बिछाने के दौरान यह शर्त रखी थी कि ज्योति विसर्जन के समय ट्रेनों को रोका जाएगा। आज भी इस परंपरा का निर्वहन किया जा रहा है।
रेलवे ट्रैक पार करने के बाद शोभायात्रा मां शीतला मंदिर पहुंची, जहां मां बम्लेश्वरी और मां शीतला की ज्योत का प्रतीकात्मक मिलन हुआ। इसके बाद श्रद्धालु महावीर तालाब पहुंचे और विधि-विधान के साथ ज्योति कलश का विसर्जन किया।
विसर्जन के दौरान “जय मां बम्लेश्वरी” के जयकारों से पूरा क्षेत्र गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने मां से सुख-समृद्धि की कामना की। यह आयोजन केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आस्था, परंपरा और सामाजिक एकता का जीवंत उदाहरण बनकर सामने आया।



