सफलता की कहानी : सुशासन की रफ्तार, 12 किमी का मुश्किल सफर अब अनिल के लिए हुआ आसान

रायपुर, 9 मई 2026 / हौसले बुलंद हों और शासन का साथ मिल जाए, तो कोई भी बाधा सपनों को नहीं रोक सकती। बिलासपुर जिले के कोटा विकासखंड अंतर्गत ग्राम नागपुरा निवासी अनिल कुमार की कहानी इसी बदलाव की मिसाल बन गई है। सुशासन तिहार के तहत मिली मोटराइज्ड ट्राइसिकल ने न सिर्फ अनिल की दूरी कम की, बल्कि उनके आत्मविश्वास को भी नई उड़ान दी है।

चुनौतियों से भरा था शिक्षा का सफर
अनिल कुमार 12वीं कक्षा के छात्र हैं। 70 प्रतिशत दिव्यांग होने के बावजूद उनके मन में पढ़ाई को लेकर गहरा उत्साह है। लेकिन घर से स्कूल की 12 किलोमीटर दूरी, खराब रास्ते और दूसरों पर निर्भरता उनकी पढ़ाई में बड़ी बाधा बन रही थी। परिवार भी उनकी सुरक्षा और आने-जाने को लेकर चिंतित रहता था।
समाधान शिविर में मिली त्वरित मदद
बानाबेल में आयोजित सुशासन तिहार समाधान शिविर अनिल के जीवन में बड़ा बदलाव लेकर आया। अनिल ने अपनी समस्या अधिकारियों के सामने रखी। प्रशासन ने संवेदनशीलता दिखाते हुए मौके पर ही आवेदन का निराकरण किया और उन्हें मोटराइज्ड ट्राइसिकल उपलब्ध कराई।
आत्मनिर्भरता की नई शुरुआत
ट्राइसिकल मिलने के बाद अनिल के चेहरे पर आत्मनिर्भरता की खुशी साफ दिखाई दी। अब वे बिना किसी सहारे के खुद स्कूल जा सकेंगे। अनिल ने कहा कि पहले स्कूल पहुंचना सबसे बड़ी चुनौती थी, जिससे पढ़ाई प्रभावित होती थी, लेकिन अब उनकी राह आसान हो गई है। उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार जताते हुए कहा कि इस मदद ने उनके सपनों को नई रफ्तार दी है।



