Muzaffarpur Hospital Fire: ICU में लगी आग से 5 की मौत, स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल, विपक्ष ने सरकार को घेरा

पटना/मुजफ्फरपुर। बिहार के मुजफ्फरपुर स्थित प्रसाद हॉस्पिटल में लगी भीषण आग ने पूरे राज्य को झकझोर दिया है। अस्पताल के ICU में आग लगने से पांच लोगों की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि 20 से अधिक लोग झुलस गए। हादसे के बाद बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था, अस्पतालों की फायर सेफ्टी और प्रशासनिक निगरानी को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, अस्पताल के ICU में शॉर्ट सर्किट के बाद एसी में ब्लास्ट हुआ। इसके बाद आग तेजी से फैल गई और कुछ ही देर में घना धुआं पूरे अस्पताल में भर गया। मरीजों, परिजनों और अस्पताल कर्मचारियों के बीच अफरा-तफरी मच गई। पांचवीं मंजिल पर स्थित ICU में फंसे मरीजों को बाहर निकालने के लिए दमकल कर्मियों को काफी मशक्कत करनी पड़ी।
हादसे के बाद राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। घटना के कुछ घंटों बाद बिहार के स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार के दिल्ली रवाना होने पर विपक्ष ने सवाल उठाए हैं। एयरपोर्ट पर पत्रकारों द्वारा हादसे को लेकर पूछे गए सवालों पर मंत्री की चुप्पी को विपक्ष ने मुद्दा बना लिया।
बिहार कांग्रेस के प्रवक्ता डॉ. स्नेहाशीष वर्धन ने कहा कि राज्य में इतनी बड़ी घटना होने के बावजूद स्वास्थ्य मंत्री का दिल्ली दौरे पर जाना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने आरोप लगाया कि बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था पहले से ही गंभीर चुनौतियों से जूझ रही है और ऐसे हादसे मरीजों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा करते हैं।
वहीं, राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि हादसे में लोगों की जान चली गई, लेकिन मंत्री की ओर से तत्काल संवेदना तक व्यक्त नहीं की गई। उन्होंने मामले में जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई की मांग की।
विवाद बढ़ने के बाद स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर घटना पर दुख जताया। उन्होंने मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए घायलों के बेहतर इलाज, राहत कार्य और हादसे की जांच के निर्देश दिए। साथ ही दोषियों के खिलाफ कार्रवाई का भरोसा भी दिलाया।
इस दर्दनाक हादसे के बाद निजी अस्पतालों में फायर सेफ्टी सिस्टम, एनओसी प्रक्रिया और सुरक्षा मानकों की जांच को लेकर बहस तेज हो गई है। लोगों का कहना है कि यदि सुरक्षा मानकों का नियमित निरीक्षण होता तो शायद इतना बड़ा हादसा टाला जा सकता था।


