40 साल तक माओवादी संगठन में सक्रिय रही काकराला समथा ने किया सरेंडर, 300 फिल्मों में काम कर चुके अभिनेता की हैं बेटी

रायपुर। तेलंगाना में करीब चार दशक तक माओवादी संगठन में सक्रिय रहीं काकराला समथा ने आत्मसमर्पण कर दिया है। तेलंगाना के मुलुगु दौरे के दौरान DGP सी.वी. आनंद की मौजूदगी में उन्होंने औपचारिक रूप से सरेंडर किया। पुलिस के मुताबिक, समथा संगठन की आखिरी वरिष्ठ महिला विचारधारकों में शामिल थीं।
काकराला समथा मूल रूप से आंध्र प्रदेश के राजमुंदरी (आर्यापुरम) की रहने वाली हैं। उनके पिता काकराला सत्यनारायण तेलुगु सिनेमा के चर्चित अभिनेता रहे हैं और उन्होंने करीब 300 फिल्मों में काम किया है।
1984 में शुरू हुआ भूमिगत सफर
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, समथा वर्ष 1984 में चेन्नई में एक कट्टरपंथी छात्र संगठन से जुड़ी थीं। इसके बाद 1985 में उन्होंने CPI (ML) पीपुल्स वॉर में प्रवेश किया। वर्ष 1991 में उन्हें एरिया कमेटी मेंबर (ACM), 1994 में जिला/डिविजनल कमेटी मेंबर और 2003 में माओवादी तेलंगाना स्टेट कमेटी मेंबर (SCM) बनाया गया।
करीब 40 वर्षों के भूमिगत जीवन के दौरान उन्होंने हैदराबाद, नल्लामाला के जंगलों, उत्तर प्रदेश-बिहार के पूर्वी क्षेत्रीय ब्यूरो और अहमदाबाद से पुणे तक के औद्योगिक कॉरिडोर में संगठन की अलग-अलग जिम्मेदारियां संभालीं।
गद्दर और वरवर राव से प्रभावित हुईं
पुलिस के मुताबिक, किशोरावस्था के दौरान समथा के घर प्रसिद्ध क्रांतिकारी कवि वरवर राव और जनगायक गद्दर का आना-जाना था। बताया जाता है कि इन दोनों के विचारों और प्रभाव के चलते समथा माओवादी आंदोलन की ओर आकर्षित हुईं।
सरेंडर के बाद 20 लाख रुपये की पुरस्कार राशि
तेलंगाना सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति के तहत समथा को 20 लाख रुपये की पुरस्कार राशि का चेक दिया गया। इसके अलावा तत्काल सहायता के तौर पर 25 हजार रुपये भी प्रदान किए गए। सरकार की नीति के अनुसार उन्हें आगे पुनर्वास योजनाओं का लाभ भी दिया जाएगा।
2026 में 265 माओवादियों ने किया आत्मसमर्पण
तेलंगाना DGP सी.वी. आनंद के अनुसार, वर्ष 2026 में अब तक राज्य में 265 माओवादी कैडर आत्मसमर्पण कर चुके हैं। इनके पास से 238 हथियार भी बरामद किए गए हैं। सरेंडर करने वालों में 3 सेंट्रल कमेटी मेंबर, 12 स्टेट कमेटी मेंबर और 81 रीजनल कमेटी मेंबर शामिल हैं।
DGP ने बताया कि राज्य से जुड़े अब केवल तीन सक्रिय कैडर संगठन में बचे हैं। इनमें वरिष्ठ माओवादी नेता मुप्पला लक्ष्मण राव उर्फ गणपति भी शामिल हैं। उन्होंने शेष माओवादियों से भी हथियार छोड़कर मुख्यधारा में लौटने और सरकार की पुनर्वास नीति का लाभ उठाने की अपील की है।



