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शीतलहर का अलर्ट: ठंड में दिल, फेफड़े और डायबिटीज के मरीज रहें सतर्क, एम्स ने जारी की स्वास्थ्य सलाह



दक्षिणी दिल्ली। मौसम विभाग द्वारा शीतलहर को लेकर अलर्ट जारी किए जाने के बीच कड़ाके की ठंड को लेकर एम्स के विशेषज्ञ चिकित्सकों ने स्वास्थ्य संबंधी चेतावनी दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि शीतलहर केवल ठिठुरन ही नहीं बढ़ाती, बल्कि हृदय, फेफड़े, डायबिटीज और किडनी से पीड़ित मरीजों के लिए गंभीर और जानलेवा साबित हो सकती है। इस दौरान बच्चे और बुजुर्ग सबसे अधिक प्रभावित होते हैं।

एम्स के चिकित्सकों ने कोल्ड वेव के दौरान नमक का सेवन कम रखने, पर्याप्त मात्रा में पानी पीने, सही समय पर टहलने और नियमित दवाइयों में किसी भी तरह की लापरवाही न बरतने की सख्त सलाह दी है।

एम्स के कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. राजीव नारंग के अनुसार ठंड में शरीर की रक्त नलियां सिकुड़ जाती हैं, जिससे रक्तचाप अचानक बढ़ सकता है। इससे हार्ट अटैक का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। सीने में जकड़न, सांस फूलना, अचानक थकान या पैरों में सूजन जैसे लक्षणों को बिल्कुल नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

विशेषज्ञों ने ठंड के मौसम में नमक, अचार, पापड़ और प्रोसेस्ड फूड से दूरी बनाए रखने की सलाह दी है। पर्याप्त पानी नहीं पीने से खून गाढ़ा हो सकता है, जिससे दिल पर दबाव बढ़ता है। बुजुर्गों को सुबह की ठंड में टहलने से बचने और धूप निकलने के बाद ही बाहर निकलने की सलाह दी गई है। चिकित्सकों के अनुसार दोपहर में भोजन से पहले हल्की वॉक सबसे सुरक्षित रहती है। प्रदूषण अधिक होने पर बाहर निकलने से बचना चाहिए और बीपी सहित अन्य नियमित दवाएं किसी भी स्थिति में नहीं छोड़नी चाहिए।

एम्स के मेडिसिन विभाग के डॉ. संजीव सिन्हा ने बताया कि ठंडी हवा से सांस की नलियां सिकुड़ जाती हैं, जिससे दमा और सीओपीडी के मरीजों की परेशानी बढ़ सकती है। खांसी, बलगम, सांस लेने में तकलीफ या बार-बार संक्रमण होने पर तुरंत सतर्क होने की जरूरत है। बाहर जाते समय नाक और मुंह ढककर रखें, बहुस्तरीय कपड़े पहनें और गर्म तरल पदार्थ जैसे सूप या चाय का सेवन करते रहें।

एम्स के प्रोफेसर राजेश खड़गावत के अनुसार ठंड के मौसम में शारीरिक गतिविधि कम नहीं होनी चाहिए। हल्की वॉक, घर में योग या स्ट्रेचिंग रोज करना जरूरी है। अधिक तला-भुना और नमकयुक्त भोजन नुकसानदेह हो सकता है। डायबिटीज और किडनी मरीजों के लिए ब्लड शुगर और किडनी फंक्शन की नियमित जांच ठंड के मौसम में और भी आवश्यक हो जाती है।

एम्स के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. राकेश लोढ़ा ने कहा कि छोटे और कम वजन वाले बच्चों पर ठंड का असर जल्दी होता है। बच्चों का सिर, कान और छाती ढककर रखना जरूरी है। यदि बच्चा सुस्त दिखे या सांस लेने में परेशानी हो, तो तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए। वहीं जेरियाट्रिक मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. अभिजीत राव के अनुसार बुजुर्गों और दमा के मरीजों के लिए ठंड और प्रदूषण दोहरा खतरा बन सकता है, इसलिए दवाइयों और नियमित फॉलो-अप में किसी भी तरह की लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए।

Chaiपुर
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NU Desk

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