Discussion on Naxalism in Lok Sabha: Amit Shah Targets Congress
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लोकसभा में नक्सलवाद पर चर्चा: अमित शाह ने कांग्रेस पर साधा निशाना, कहा- ‘नक्सलियों के लिए विपक्ष को दर्द’

नई दिल्ली। नक्सल मुक्त भारत पर लोकसभा में चर्चा का जवाब देते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि देश लंबे समय से नक्सलवाद से पीड़ित था, लेकिन अब हम नक्सल मुक्त भारत की बात कर रहे हैं। शाह ने कहा कि हम आदिवासियों के लिए लड़ रहे हैं। देश के 12 राज्य नक्सलवाद से पीड़ित थे और वामपंथी विचारधारा से इन राज्यों में नक्सलवाद फैला। उन्होंने कहा कि बस्तर से नक्सलवाद लगभग समाप्त हो गया है।

गृह मंत्री ने कहा कि बस्तर के हर गांव में स्कूल बनाए गए हैं, जबकि पहले लाल आतंक की परछाई के कारण वहां विकास नहीं हो पाया। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि जो हथियार उठाएगा, उसका हिसाब होगा। शाह ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि नक्सलियों के लिए विपक्ष को दर्द हो रहा है और आदिवासियों को लेकर कांग्रेस को अपने गिरेबान में झांकना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली सरकारों ने आदिवासियों का विकास नहीं किया और जनता के साथ मिलकर ही नक्सलवाद को खत्म किया गया।

‘नक्सल विचार में सत्ता बंदूक से निकलती है’

अमित शाह ने कहा कि कांग्रेस ने आदिवासियों को घर और पानी जैसी मूलभूत सुविधाएं नहीं दीं, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश नक्सलवाद मुक्त हुआ। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद का विकास से कोई मतलब नहीं है और नक्सल विचारधारा में सत्ता बंदूक से निकलती है। शाह ने आरोप लगाया कि नक्सली अपने ही लोगों का खून बहाते हैं और आदिवासियों को बरगलाकर उन्हें हथियार दिए जाते हैं। उन्होंने कहा कि आज वामपंथी उग्रवाद खत्म होने में जनता का भरपूर सहयोग मिला है।

‘रेड कॉरिडोर में नक्सलवाद के चलते आई गरीबी’

शाह ने कहा कि नक्सलियों के आदर्श माओ हैं और आदिवासी माओ को अपना आदर्श मानने लगे। उन्होंने इस धारणा को खारिज करते हुए कहा कि गरीबी के कारण नक्सलवाद नहीं फैला, बल्कि रेड कॉरिडोर में नक्सलवाद के चलते गरीबी आई। उन्होंने कहा कि आदिवासी पढ़ नहीं पाए, इसलिए स्कूल जला दिए गए।

’60 साल कांग्रेस ने आदिवासियों को नहीं दिया घर-पानी’

गृह मंत्री ने कांग्रेस को घेरते हुए पूछा कि 75 साल में 60 साल तक शासन करने वाली कांग्रेस ने आदिवासी अभी तक विकास से क्यों वंचित रहे? उन्होंने कहा कि आदिवासियों का विकास अब प्रधानमंत्री मोदी कर रहे हैं। शाह ने कहा, “60 साल कांग्रेस ने उन्हें घर नहीं दिया, पानी नहीं दिया, स्कूल नहीं बनाए, बैंक की सुविधा नहीं पहुंचने दी। पहले अपने गिरेबान में झांककर देखो कि दोषी कौन है।”

‘कांग्रेस के शासन में फैली माओवादी विचारधारा’

शाह ने आरोप लगाया कि कांग्रेस के शासन में माओवादी विचारधारा फैली और इंदिरा गांधी के राजनीतिक स्वार्थ से नक्सलवाद फैला। उन्होंने कहा कि 1970 के दशक में नक्सलबाड़ी से नक्सलवाद की शुरुआत हुई और सलवा जुडूम की शुरुआत कांग्रेस नेता ने की। उन्होंने कहा कि 1970 से 2004 के बीच नक्सलवाद देश में फैला और समस्या का समाधान बातचीत से निकलता है, हथियार से नहीं। शाह ने कहा कि नक्सलियों के पास ज्यादातर हथियार पुलिस के लूटे हुए हैं।

‘नक्सली हथियार डाल दें, नहीं तो गोली का जवाब गोली से’

गृह मंत्री ने कहा कि नक्सली हिंसा करने वालों के दिन अब समाप्त हो गए हैं। उन्होंने कहा, “मैं 50 बार कह चुका हूं कि नक्सली हथियार डाल दें, नहीं तो सरकार अब गोली का जवाब गोली से देगी। संविधान को कोई चुनौती नहीं दे सकता। बंदूक चलाने वालों से अब कोई बात नहीं। हथियार डालने वालों को सरकार मदद करेगी।”

‘नक्सलियों से लड़ते हुए पांच हजार जवान शहीद’

शाह ने बताया कि नक्सलियों से लड़ते हुए पांच हजार जवान शहीद हुए हैं। उन्होंने अर्बन नक्सलियों पर निशाना साधते हुए कहा कि वे मानवता के साथ नहीं हैं और मानवता के दोहरे चरित्र को स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि राजनीतिक इच्छाशक्ति से नक्सलवाद खत्म किया गया। शाह ने कहा कि 2014 में प्रधानमंत्री मोदी सत्ता में आए और 2026 तक नक्सलवाद की समाप्ति हो गई।

‘CPI(ML) ही आज के नक्सली, विचारधारा दूसरे देश से प्रेरित’

शाह ने कहा कि सीपीआई (एमएल) ही आज के नक्सली हैं, जिनका मकसद विकास नहीं है और उनकी विचारधारा दूसरे देश से प्रेरित है। उन्होंने बताया कि 2014 के बाद नक्सल प्रभावित इलाकों में विकास के लिए 20 हजार करोड़ रुपये खर्च किए गए, 12,500 किलोमीटर सड़कें बनाई गईं और आदिवासी इलाकों में 5,000 मोबाइल टावर स्थापित किए गए। उन्होंने आरोप लगाया कि छत्तीसगढ़ में कांग्रेस सरकार ने नक्सलियों को बचाया।

‘तीन साल में 706 नक्सली मुठभेड़ में ढेर’

गृह मंत्री ने कहा कि कांग्रेस की सरकारों के कारण नक्सलवाद के खात्मे में देरी हुई। उन्होंने बताया कि पिछले तीन वर्षों में 706 नक्सली मुठभेड़ में मारे गए। वर्ष 2024 से 2026 के बीच 4,839 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया और 2,208 नक्सली जेल में गए। शाह ने कहा कि नक्सली हिंसा करने वालों के दिन अब लद गए।

Chaiपुर
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NU Desk

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