आजादी के 78 साल बाद अबुझमाड़ के मयूरीपारा तक पहुंची पक्की सड़क, पीएम ग्राम सड़क योजना ने बदली बीजापुर के ग्रामीणों की तकदीर

रायपुर/बीजापुर। छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग से विकास की एक बेहद सुखद और बड़ी तस्वीर सामने आ रही है। बीजापुर जिले के भैरमगढ़ विकासखंड के अंतर्गत आने वाले अतिसंवेदनशील और कभी धुर नक्सल प्रभावित रहे अबुझमाड़ क्षेत्र में विकास की नई बयार बहने लगी है। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना ने इस सुदूर वनांचल के ग्रामीणों की जिंदगी को पूरी तरह बदल दिया है। वर्षों तक बुनियादी सुविधाओं और विकास की मुख्यधारा से कटे रहे मयूरीपारा गांव तक आखिरकार आजादी के 78 साल बाद पहली बार सड़क पहुंच गई है। इस नई सड़क के बन जाने से स्थानीय आदिवासियों को अब आवागमन के साथ-साथ शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी जरूरी सुविधाओं का सीधा लाभ मिलने लगा है।
16 किलोमीटर लंबी सड़क से जुड़ेगा दूरस्थ इलाका, जून के अंत तक पूरा हो जाएगा काम
सड़क निर्माण से जुड़ी तकनीकी जानकारी देते हुए विभागीय अधिकारियों ने बताया कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY Chhattisgarh) के तहत ग्राम बैल से मयूरीपारा तक कुल 16 किलोमीटर लंबी पक्की सड़क का निर्माण तेजी से किया जा रहा है। इस बेहद चुनौतीपूर्ण और बड़ी परियोजना के तहत अब तक 13 किलोमीटर हिस्से में मिट्टीकृत सड़क बनाने का काम पूरी तरह से खत्म हो चुका है। इसके साथ ही सड़क पर मुरूमीकरण करने और रास्ते में पड़ने वाली छह पुलियों का निर्माण कार्य भी अपने अंतिम चरण में पहुंच गया है। पीडब्ल्यूडी और संबंधित विभाग के इंजीनियरों के मुताबिक सड़क का जो भी थोड़ा-बहुत शेष काम बचा हुआ है, उसे इसी जून 2026 के महीने में हर हाल में पूरा कर लिया जाएगा।
जंगलों के दुर्गम रास्तों और नाव के सफर से मिली मुक्ति, सरपंच ने जताया आभार
ग्राम बैल की स्थानीय सरपंच श्रीमती जुग्गी अठामी ने इस ऐतिहासिक विकास पर खुशी जताते हुए पुरानी दिक्कतों को साझा किया। उन्होंने बताया कि इतने दशकों तक कोई पक्की सड़क सुविधा नहीं होने के कारण ग्रामीणों को अपनी रोजमर्रा की जरूरतों, राशन, इलाज और अन्य सरकारी कामों के लिए घने और खतरनाक जंगलों के बीच से होकर कई किलोमीटर का रास्ता पैदल ही तय करना पड़ता था। सबसे ज्यादा आफत बरसात के मौसम में आती थी, जब उफनती नदी को पार करने के लिए लोगों को अपनी जान जोखिम में डालकर नाव का सहारा लेना पड़ता था। सरपंच के मुताबिक कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और नक्सली प्रभाव के कारण यह इलाका हमेशा मुख्यधारा से कटा रहा, लेकिन अब इस सड़क के बनने से ग्रामीणों को एक बहुत बड़ी राहत मिल गई है।
स्कूली बच्चों की राह हुई आसान, समय पर अस्पताल पहुंच सकेंगे गंभीर मरीज
इस नई सड़क के बन जाने से सबसे बड़ा और सकारात्मक असर इलाके की शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था पर देखने को मिल रहा है। पक्की राह बन जाने से अब सुदूर गांवों के स्कूली बच्चों का रोजाना स्कूल आना-जाना बेहद आसान और सुरक्षित हो गया है, जिससे क्षेत्र में साक्षरता दर बढ़ेगी। इसके अलावा आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं तक भी अब ग्रामीणों की पहुंच बेहद मजबूत हो गई है। अब किसी भी डिलीवरी या गंभीर बीमारी की स्थिति में एम्बुलेंस सीधे गांव तक पहुंच सकेगी और मरीजों को बिना समय गंवाए बीजापुर या भैरमगढ़ के बड़े सरकारी अस्पतालों (Government Hospitals) में पहुंचाया जा सकेगा।
इलाके में बढ़ेंगी सामाजिक और आर्थिक गतिविधियां, ग्रामीणों में जागी बेहतर भविष्य की उम्मीद
मयूरीपारा के स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि यह सड़क उनके लिए सिर्फ आने-जाने का कोई रास्ता भर नहीं है, बल्कि यह उनके पूरे क्षेत्र के विकास, रोजगार, अच्छी शिक्षा और एक बेहतर उज्जवल भविष्य की नई उम्मीद लेकर आई है। बैल से मयूरीपारा मार्ग के पूरी तरह शुरू हो जाने के बाद इस पूरे आदिवासी अंचल में सामाजिक और आर्थिक गतिविधियों (Economic Growth) को एक नई और तेज रफ्तार मिलेगी। इस सफल परियोजना ने साबित कर दिया है कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के माध्यम से अबुझमाड़ जैसे देश के सबसे पिछड़े और दूरस्थ नक्सल प्रभावित क्षेत्रों को भी विकास की मुख्यधारा से जोड़ा जा सकता है।



