ग्रामीण भारत को बेहतर स्वास्थ्य सेवा मिले, इसके लिए ‘भारत चिकित्सा सेवा आयोग’ का गठन हो : सांसद बृजमोहन अग्रवाल

रायपुर/नई दिल्ली। वरिष्ठ भाजपा नेता एवं रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने सोमवार को लोकसभा में नियम 377 के तहत देश के ग्रामीण स्वास्थ्य तंत्र को मजबूत बनाने का महत्वपूर्ण विषय उठाते हुए ‘भारत चिकित्सा सेवा आयोग’ (Indian Medical Service Commission) के गठन की मांग की।
उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में डॉक्टरों की लगातार बनी हुई कमी केवल एक प्रशासनिक चुनौती नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों के स्वास्थ्य और जीवन से जुड़ा गंभीर विषय है, जिसका स्थायी समाधान समय की मांग है।
सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने सदन में कहा कि देश के लगभग 6.4 लाख गांवों में रहने वाली बड़ी आबादी आज भी गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में सर्जन, बाल रोग विशेषज्ञ, स्त्री रोग विशेषज्ञ और अन्य विशेषज्ञ चिकित्सकों के लगभग 80 प्रतिशत पद खाली हैं, जिससे ग्रामीण मरीजों को समय पर उपचार नहीं मिल पाता।
उन्होंने विशेष रूप से छत्तीसगढ़ का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रदेश के लगभग 19,698 गांव, जिनमें बड़ी संख्या आदिवासी और वनांचल क्षेत्रों की है, आज भी स्वास्थ्य सुविधाओं की गंभीर कमी से जूझ रहे हैं। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों की भारी कमी, विशेषज्ञ चिकित्सकों का अभाव और दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के कारण स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित होती हैं। परिणामस्वरूप ग्रामीण परिवारों को मामूली इलाज के लिए भी लंबी दूरी तय करनी पड़ती है या बड़े शहरों का रुख करना पड़ता है।
श्री अग्रवाल ने कहा कि वर्तमान व्यवस्था में ग्रामीण सेवा को अधिकांश चिकित्सक एक अनिवार्य दायित्व के रूप में देखते हैं, जबकि इसे सम्मानजनक और आकर्षक सेवा के रूप में विकसित किया जाना चाहिए। इसके लिए एक ऐसे राष्ट्रीय स्तर के स्वतंत्र चिकित्सा सेवा आयोग की आवश्यकता है, जो विशेष रूप से ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के लिए डॉक्टरों की भर्ती, प्रशिक्षण, पदस्थापना और सेवा प्रबंधन का दायित्व संभाले।
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़, झारखंड, ओडिशा जैसे राज्यों में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी सबसे अधिक महसूस की जाती है। यदि एक समर्पित राष्ट्रीय चिकित्सा सेवा कैडर तैयार किया जाए, तो इन राज्यों के दूरस्थ इलाकों में भी योग्य चिकित्सकों की नियमित उपलब्धता सुनिश्चित की जा सकेगी।
सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि यह आयोग केवल भर्ती तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि ग्रामीण सेवा को सम्मान, बेहतर करियर अवसर, विशेष प्रोत्साहन और पेशेवर पहचान देने का माध्यम बनेगा। इससे डॉक्टर मजबूरी में नहीं, बल्कि सेवा और सम्मान की भावना के साथ गांवों में कार्य करेंगे तथा ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था अधिक सशक्त और स्थायी बनेगी।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “स्वस्थ भारत” के संकल्प को साकार करने में ऐसा आयोग महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। साथ ही उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि ग्रामीण भारत, विशेषकर छत्तीसगढ़ के आदिवासी, वनांचल और दूरस्थ क्षेत्रों की स्वास्थ्य आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए इस दिशा में शीघ्र सकारात्मक पहल की जाए।
श्री अग्रवाल ने कहा कि एक विकसित भारत का सपना तभी साकार होगा, जब गांव का अंतिम व्यक्ति भी समय पर विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाएं प्राप्त कर सके। छत्तीसगढ़ के ग्रामीण और आदिवासी अंचलों तक गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधाएं पहुंचाना केवल विकास का विषय नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय और संवेदनशील शासन की सबसे बड़ी पहचान है।



