शराब घोटाला मनी लॉन्ड्रिंग केस में रामगोपाल अग्रवाल को राहत नहीं, कोर्ट ने जमानत देने से किया इनकार

रायपुर। छत्तीसगढ़ कांग्रेस के पूर्व कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल की जमानत याचिका मंगलवार को PMLA की विशेष अदालत ने खारिज कर दी। कथित शराब घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ED की गिरफ्तारी के बाद रामगोपाल अग्रवाल की ओर से अदालत में जमानत आवेदन पेश किया गया था। दोनों पक्षों की लंबी बहस सुनने के बाद अदालत ने जमानत याचिका पर फैसला सुनाया।
अदालत ने मामले की गंभीर प्रकृति को देखते हुए जमानत देने से इनकार किया। सुनवाई के दौरान गवाहों के प्रभावित होने की आशंका का भी उल्लेख किया गया।
11 अगस्त को ED ने किया था गिरफ्तार
रामगोपाल अग्रवाल को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 11 अगस्त 2026 को गिरफ्तार किया था। इससे पहले वे कथित शराब घोटाले से जुड़े मामले में करीब तीन साल तक फरार रहे थे। 8 जुलाई को उन्होंने रायपुर स्थित EOW कार्यालय पहुंचकर सरेंडर किया था।
सरेंडर के बाद उनका मेडिकल परीक्षण कराया गया और उन्हें कोर्ट में पेश किया गया। अदालत ने 9 जुलाई से 17 जुलाई तक उन्हें पुलिस रिमांड पर भेजा था। रिमांड अवधि पूरी होने के बाद उन्हें 5 अगस्त तक EOW की कस्टडी में रखा गया। इसके बाद ED ने उन्हें गिरफ्तार किया।
EOW की FIR और चार्जशीट के आधार पर ED की जांच
ED के अनुसार, इस मामले में जांच रायपुर EOW/ACB की ओर से दर्ज FIR, स्पेशल कोर्ट में दाखिल चार्जशीट और सप्लीमेंट्री चार्जशीट के आधार पर शुरू की गई। इन दस्तावेजों में वर्ष 2019 से 2023 के बीच छत्तीसगढ़ के आबकारी प्रशासन में कथित आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, जालसाजी और भ्रष्टाचार से जुड़े आरोपों का उल्लेख है।
जांच एजेंसियां सरकारी शराब कारोबार में कथित अनियमितताओं, अवैध वसूली और पैसों के लेन-देन की जांच कर रही हैं।
3200 करोड़ से ज्यादा के कथित शराब घोटाले की जांच
छत्तीसगढ़ शराब घोटाला मामले में ED की FIR में 3200 करोड़ रुपये से अधिक की कथित वित्तीय अनियमितताओं का आरोप है। मामले में राजनेताओं, आबकारी विभाग के अधिकारियों और कारोबारियों समेत कई लोगों के खिलाफ कार्रवाई हुई है।
ED की जांच के अनुसार, तत्कालीन भूपेश सरकार के कार्यकाल में तत्कालीन IAS अधिकारी अनिल टुटेजा, आबकारी विभाग के तत्कालीन MD एपी त्रिपाठी और कारोबारी अनवर ढेबर से जुड़े कथित सिंडिकेट के जरिए शराब कारोबार में अनियमितताएं किए जाने का आरोप है।
फरवरी 2019 में बैठक का दावा
जांच एजेंसियों के मुताबिक, फरवरी 2019 में रायपुर के जेल रोड स्थित होटल वेनिंगटन में शराब कारोबार से जुड़े लोगों की बैठक हुई थी। आरोप है कि इस बैठक में डिस्टलरी से सप्लाई होने वाली शराब पर प्रति पेटी कमीशन तय करने और इसके बदले रेट बढ़ाने का आश्वासन देने पर सहमति बनी थी।
जांच में कथित लेन-देन का हिसाब रखने के लिए कारोबार को A, B और C पार्ट में बांटे जाने की बात भी सामने आई है।
कई लोगों की हो चुकी है गिरफ्तारी
EOW के मुताबिक, विदेशी शराब पर कथित सिंडिकेट द्वारा लिए गए कमीशन की भी जांच की जा रही है। इस मामले में पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा, अरुणपति त्रिपाठी, अरविंद सिंह, अनवर ढेबर, त्रिलोक सिंह ढिल्लन, अनुराग द्विवेदी, अमित सिंह, दीपक दुआरी, दिलीप टुटेजा और सुनील दत्त समेत कई लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। इनमें से ज्यादातर आरोपी जमानत पर बाहर हैं।



