आबकारी विभाग का नया कांड! जॉइनिंग के बाद भी कर्मचारियों की अटेंडेंस गायब, महीनों से मुफ्त में काम कराने के आरोप…

शराब दुकानों में कर्मचारियों की जॉइनिंग के बाद भी एक महीने तक अटेंडेंस नहीं लगाने का आरोप, ट्रांसफर लेकर पहुंचे कर्मचारियों से कई महीनों तक बिना भुगतान काम कराने की शिकायत...
रायपुर। छत्तीसगढ़ के आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर एक नया मामला सामने आया है, जिसने विभागीय व्यवस्था और शराब दुकानों के संचालन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि शराब दुकानों में कर्मचारियों की जॉइनिंग होने के बावजूद उनकी अटेंडेंस समय पर दर्ज नहीं की जा रही है। कई कर्मचारियों का दावा है कि जॉइनिंग के बाद करीब एक महीने तक उनकी उपस्थिति ही दर्ज नहीं की गई।

मामला यहीं खत्म नहीं होता। आरोप यह भी है कि एक शराब दुकान से दूसरी दुकान और एक शहर से दूसरे शहर ट्रांसफर होकर पहुंचे कर्मचारियों से कई-कई महीनों तक काम तो कराया गया, लेकिन उनकी अटेंडेंस और भुगतान की प्रक्रिया को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं की गई।
जॉइनिंग हुई, लेकिन अटेंडेंस का अता-पता नहीं?
शराब दुकानों में नियुक्ति या स्थानांतरण के बाद कर्मचारी नियमित रूप से अपनी ड्यूटी पर पहुंच रहे हैं। लेकिन आरोप है कि संबंधित कर्मचारियों की उपस्थिति दर्ज करने में जानबूझकर देरी की जा रही है। ऐसे में सवाल उठता है कि अगर कर्मचारी विभागीय व्यवस्था के तहत काम कर रहे हैं तो उनकी अटेंडेंस समय पर क्यों नहीं लगाई जा रही? सबसे बड़ा सवाल यह है कि अटेंडेंस रिकॉर्ड में देरी का खामियाजा आखिर कर्मचारियों को क्यों भुगतना पड़ रहा है?
ट्रांसफर लेकर पहुंचे कर्मचारी, महीनों से काम कराने का आरोप...
कुछ कर्मचारियों के मामले में आरोप है कि वे जब एक शहर से दूसरे शहर स्थानांतरित हो कर जाते हैं और नई जगह पहुंचकर अपनी ड्यूटी की शुरुआत करते हैं, इसके बावजूद उनकी सेवा, अटेंडेंस और भुगतान को लेकर कथित तौर पर लंबी प्रक्रिया चलती रही।

नाम न उजागर करने की शर्त पर कर्मचारियों ने बताया कि उनसे कई महीनों तक नियमित काम लिया गया, लेकिन भुगतान की स्थिति स्पष्ट नहीं की गई। यदि ये आरोप सही हैं तो यह सवाल बेहद गंभीर है कि आखिर किस आधार पर कर्मचारियों से लंबे समय तक काम कराया गया?
इन्नो सोर्स कंपनी की भूमिका पर भी सवाल...
पूरे मामले में इन्नो सोर्स कंपनी की भूमिका भी सवालों के घेरे में बताई जा रही है। कर्मचारियों की नियुक्ति, ट्रांसफर, अटेंडेंस और भुगतान की प्रक्रिया में कंपनी की क्या जिम्मेदारी है और विभागीय अधिकारियों की निगरानी किस स्तर पर होती है, इसे लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

मामले में यह भी जानना जरूरी होगा कि कर्मचारियों की जॉइनिंग के बाद उनकी अटेंडेंस दर्ज करने की जिम्मेदारी किस अधिकारी या एजेंसी की है और अगर अटेंडेंस नहीं लगी तो इतने लंबे समय तक इस पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
आबकारी विभाग के अधिकारियों से उठे गंभीर सवाल...
इस पूरे मामले ने आबकारी विभाग के संबंधित अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। कर्मचारियों से काम लेने के बावजूद यदि उनकी अटेंडेंस और भुगतान प्रक्रिया समय पर पूरी नहीं होती है, तो इसकी जिम्मेदारी आखिर किसकी होगी?

अब देखने वाली बात यह होगी कि विभाग इन आरोपों की जांच करता है या फिर मामला कागजी कार्रवाई तक ही सीमित रह जाएगा।



