
कोरबा। कोरबा कांग्रेस की सियासत इन दिनों एक बार फिर गरमाती नजर आ रही है। पार्टी के भीतर दो अलग-अलग खेमों की सक्रियता ने स्थानीय राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं को तेज कर दिया है। एक तरफ पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल का खेमा अपने मुद्दों को लेकर मैदान में है, तो दूसरी ओर श्याम नारायण सोनी समर्थक गुट भी लगातार सक्रिय दिखाई दे रहा है।
राजनीतिक जानकारों के बीच इसे लेकर चर्चा है कि दोनों खेमों के बीच सिर्फ स्थानीय मुद्दों को लेकर सक्रियता नहीं, बल्कि संगठन के भीतर अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत दिखाने की होड़ भी नजर आ रही है। यही वजह है कि रायपुर से लेकर दिल्ली तक अपनी कन्फिडेंशियल रिपोर्ट यानी CR मजबूत करने की कवायद के तौर पर इन गतिविधियों को देखा जा रहा है।
शराब दुकान से सड़क तक आमने-सामने आए दोनों गुट...
हाल के दिनों में दोनों खेमे अलग-अलग जन मुद्दों को लेकर सड़क पर उतरते नजर आए। पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने शराब दुकान शिफ्टिंग का मुद्दा उठाकर प्रदर्शन किया, जबकि श्याम नारायण सोनी समर्थक खेमे ने परसाभाठा–रूमगढ़ा सड़क को लेकर विरोध प्रदर्शन किया।
हालांकि, सड़क आंदोलन को लेकर स्थानीय स्तर पर यह सवाल भी उठता रहा कि जिस सड़क को लेकर विरोध किया गया, उसका भूमिपूजन पहले ही मंत्री लखनलाल देवांगन द्वारा किया जा चुका था। ऐसे में विपक्षी खेमे की इस सक्रियता को लेकर भी राजनीतिक चर्चाएं शुरू हो गईं।
खराब सड़कों ने फिर बढ़ाई कांग्रेस की अंदरूनी सियासत
पिछले 24 घंटे में शहर की खराब सड़कों को लेकर दोनों खेमों की सक्रियता एक बार फिर सामने आई है। सड़क और विकास से जुड़े मुद्दों को लेकर कांग्रेस नेताओं की अलग-अलग गतिविधियों ने पार्टी के भीतर चल रही राजनीतिक प्रतिस्पर्धा को और हवा दे दी है।
वहीं दूसरी ओर, मंत्री लखनलाल देवांगन की ओर से शहर में डामरीकरण और सड़क निर्माण कार्यों के लिए नई स्वीकृतियां दिलाने की तैयारी की चर्चा है। जानकारी के मुताबिक, पहले ही करीब 6 करोड़ रुपये की राशि जारी की जा चुकी है, जबकि अब लगभग 15 से 20 करोड़ रुपये की अतिरिक्त स्वीकृति की तैयारी बताई जा रही है।
ऐसे में आने वाले दिनों में सड़क का मुद्दा सिर्फ विकास का सवाल रहेगा या फिर कोरबा कांग्रेस की अंदरूनी सियासत का नया अखाड़ा बनेगा, यह देखना दिलचस्प होगा।
भूपेश बघेल को बधाई नहीं देने पर क्यों शुरू हुई चर्चा?
इधर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के जन्मदिन पर जयसिंह अग्रवाल के सोशल मीडिया हैंडल से बधाई संदेश सामने नहीं आने को लेकर भी राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं।
इससे पहले जयसिंह अग्रवाल के जन्मदिन से जुड़े पोस्टरों में भूपेश बघेल की तस्वीर नजर नहीं आने को लेकर भी सियासी अटकलें लगाई गई थीं। 2023 विधानसभा चुनाव के बाद दोनों नेताओं के बीच कथित तौर पर बढ़ी दूरी को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चा पहले से ही होती रही है।

हालांकि, सोशल मीडिया पर किसी पोस्ट का होना या न होना अपने आप में किसी राजनीतिक रिश्ते का आधिकारिक प्रमाण नहीं माना जा सकता, लेकिन कांग्रेस की मौजूदा अंदरूनी सक्रियता के बीच इस घटनाक्रम ने चर्चाओं को जरूर बढ़ा दिया है।
क्या कोरबा कांग्रेस में बढ़ रही है गुटबाजी?
कुल मिलाकर शराब दुकान शिफ्टिंग से लेकर सड़क, विकास कार्यों और सोशल मीडिया गतिविधियों तक जिस तरह कांग्रेस के अलग-अलग खेमे सक्रिय दिखाई दे रहे हैं, उससे कोरबा कांग्रेस की अंदरूनी सियासत को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
अब बड़ा सवाल यही है कि यह जन मुद्दों को लेकर कांग्रेस की स्वाभाविक राजनीतिक सक्रियता है या फिर संगठन में अपनी ताकत और प्रभाव दिखाने की होड़?
आने वाले दिनों में रायपुर और दिल्ली तक कांग्रेस संगठन में इन गतिविधियों की क्या तस्वीर बनती है, इस पर राजनीतिक नजरें टिकी रहेंगी।


