CM हेल्पलाइन से लेकर कमिश्नर तक शिकायत, फिर भी कार्रवाई शून्य: क्या शराब दुकानों में ‘ओवर रेटिंग’ के खेल में आबकारी विभाग की मिलीभगत है?

रायपुर। छत्तीसगढ़ के राजस्व में आबकारी विभाग की भूमिका सबसे अहम मानी जाती है, जहां सरकारी खजाने का लगभग 30 से 40 प्रतिशत रेवेन्यू शराब की बिक्री से आता है। राजस्व में जितना बड़ा यह योगदान है, उससे कहीं अधिक यह विभाग भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के विवादों से घिरा रहता है।
शराब दुकानों में चल रहे ओवर रेटिंग के गोरखधंधे को लेकर लगातार खुलासे हो रहे हैं। इस संबंध में आबकारी कमिश्नर पदुमसिंह इल्मा से औपचारिक शिकायत की गई थी। उस दौरान उन्होंने सख्त कार्रवाई का भरोसा दिया था, लेकिन आज दिनांक तक संबंधित आबकारी अधिकारी विक्रम ठाकुर पर किसी भी प्रकार की कार्रवाई नहीं की गई।
CM हेल्पलाइन में दर्ज शिकायत, फिर भी केवल आश्वासन...
जनता की शिकायतों के त्वरित समाधान के लिए बने CM हेल्पलाइन (1076) में भी इस मामले की शिकायत दर्ज कराई गई है। हालांकि, वहां से भी अब तक केवल आश्वासनों का दौर ही चल रहा है, धरातल पर नतीजा शून्य है।


विभाग के दोहरे रवैये पर उठ रहे सवाल...
- दिखावे की सख्ती: एक तरफ विभाग ओवर रेटिंग पर निचले स्तर के कर्मचारियों पर त्वरित निलंबन की कार्रवाई कर अपनी पीठ थपथपाता है।
- पुख्ता सबूतों के बावजूद चुप्पी: दूसरी तरफ, तमाम साक्ष्य और शिकायतें मौजूद होने के बाद भी विक्रम ठाकुर जैसे अधिकारियों पर हाथ डालने से बचता नजर आ रहा है।
सारे सबूत होने के बावजूद कार्रवाई न होना विभागीय पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े करता है। क्या आला अधिकारियों की कार्रवाई सिर्फ दिखावे तक सीमित है, या फिर इस पूरे मामले में उच्च स्तर पर भी संरक्षण प्राप्त है? अब देखना यह होगा कि इस खुलासे के बाद जिम्मेदार अधिकारी नींद से जागते हैं या फिर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा।



