मिड-डे मील पर हाईकोर्ट सख्त, पूछा- मिलेट चिक्की का लाभ सिर्फ 7 जिलों तक क्यों?

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में संचालित मिड-डे मील योजना को लेकर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। सुनवाई के दौरान अदालत ने राज्य सरकार से कई महत्वपूर्ण सवाल पूछते हुए लिखित जवाब तलब किया है। हाईकोर्ट ने विशेष रूप से पूछा कि जब मिलेट चिक्की योजना लागू है, तो सिर्फ 7 जिलों के बच्चों को ही इसका लाभ क्यों दिया जा रहा है, जबकि राज्य के बाकी 26 जिलों के बच्चे इससे वंचित हैं।
अदालत ने इस व्यवस्था पर समानता के अधिकार का सवाल उठाते हुए सरकार से स्पष्ट करने को कहा कि सभी जिलों में एक समान व्यवस्था क्यों नहीं लागू की गई।
मिड-डे मील व्यवस्था पर कोर्ट की निगरानी
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने मिड-डे मील योजना के संचालन को लेकर भी कई अहम निर्देश दिए। अदालत ने खाद्यान्न आवंटन की प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल बनाने पर जोर दिया, ताकि पारदर्शिता बनी रहे और किसी तरह की अनियमितता की संभावना कम हो।
इसके साथ ही कोर्ट ने कूपन व्यवस्था को पूरी तरह समाप्त करने के निर्देश दिए। अदालत का मानना है कि डिजिटल प्रणाली अपनाने से वितरण व्यवस्था अधिक प्रभावी और जवाबदेह बनेगी।
सेंट्रलाइज्ड किचन को सैद्धांतिक मंजूरी
हाईकोर्ट ने मिड-डे मील व्यवस्था को और बेहतर बनाने के उद्देश्य से सेंट्रलाइज्ड किचन प्रणाली को भी सैद्धांतिक मंजूरी दी है। इससे भोजन की गुणवत्ता और वितरण व्यवस्था में सुधार की उम्मीद जताई गई है।
मामले की अगली सुनवाई 12 अक्टूबर को होगी। तब तक राज्य सरकार को अदालत के सभी सवालों का विस्तृत लिखित जवाब प्रस्तुत करना होगा।



