निर्जला एकादशी कल: एक व्रत से मिलता है सभी एकादशियों का पुण्य, जानें शुभ मुहूर्त और महत्व

रायपुर। हिंदू धर्म में निर्जला एकादशी का विशेष महत्व माना जाता है। इसे वर्ष की सबसे पुण्यदायी और कठिन एकादशी कहा जाता है। इस दिन श्रद्धालु बिना अन्न और जल ग्रहण किए भगवान विष्णु की आराधना करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि जो व्यक्ति पूरे वर्ष की सभी एकादशियों का व्रत नहीं रख पाता, उसे केवल निर्जला एकादशी का व्रत करने से 24 एकादशियों के बराबर पुण्य प्राप्त होता है।

पंचांग के अनुसार, एकादशी तिथि 24 जून की शाम 6 बजकर 12 मिनट से प्रारंभ होकर 25 जून की रात 8 बजकर 09 मिनट तक रहेगी। उदयातिथि के आधार पर निर्जला एकादशी का व्रत 25 जून को रखा जाएगा। वहीं व्रत का पारण 26 जून को सुबह 5 बजकर 25 मिनट से 8 बजकर 13 मिनट के बीच किया जाएगा।
भीमसेन से जुड़ी है खास कथा
महाभारत काल की एक प्रसिद्ध कथा के अनुसार, पांडवों में भीमसेन को भोजन अत्यंत प्रिय था और उनके लिए नियमित उपवास करना कठिन था। तब महर्षि व्यास ने उन्हें वर्ष में केवल एक बार निर्जला एकादशी का व्रत रखने की सलाह दी। भीमसेन ने इस व्रत को पूरी श्रद्धा से किया और उन्हें सभी एकादशियों का पुण्य प्राप्त हुआ। इसी कारण इसे भीमसेनी एकादशी भी कहा जाता है।
ऐसे करें व्रत और पूजा
निर्जला एकादशी के दिन सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। भगवान विष्णु की पूजा करें, दीपक जलाएं और व्रत का संकल्प लें। स्वास्थ्य की दृष्टि से जो लोग निर्जल व्रत नहीं रख सकते, वे फलाहार या जल ग्रहण कर भी पूजा कर सकते हैं। धर्माचार्यों के अनुसार व्रत में श्रद्धा और भक्ति सबसे अधिक महत्वपूर्ण होती है।
दान और मंत्र जाप का विशेष महत्व
निर्जला एकादशी पर जल, अन्न, फल और वस्त्र का दान अत्यंत शुभ माना गया है। विशेष रूप से गर्मी के मौसम में प्यासे लोगों को जल पिलाने का बड़ा महत्व बताया गया है। इस दिन “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करने से भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह व्रत सुख, समृद्धि, मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति प्रदान करने वाला माना जाता है। यही वजह है कि देशभर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस पावन व्रत का पालन करते हैं।


