The government cannot change recruitment rules mid-stream.
Chhattisgarh

भर्ती नियमों में बीच खेल में बदलाव नहीं कर सकती सरकार: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, पीड़ित को 40 दिन में नौकरी देने का आदेश

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सरकारी नौकरियों की भर्ती प्रक्रिया को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण और बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने साफ लफ्जों में कहा है कि भर्ती प्रक्रिया शुरू होने के बाद विभाग विज्ञापन में दी गई शर्तों से बाहर जाकर अपनी तरफ से कोई नई पात्रता या दस्तावेज की शर्त नहीं जोड़ सकता। कोर्ट ने कोरोना के मुश्किल समय में अपनी सेवाएं देने वाले एक अभ्यर्थी के 10 बोनस अंक काटने की स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई को पूरी तरह से मनमाना और गैरकानूनी माना है। इसके साथ ही पीड़ित युवक को 40 दिनों के भीतर नियुक्ति देने का कड़ा निर्देश जारी किया है।

मेरिट लिस्ट में पहले नंबर पर था अभ्यर्थी, विभाग की मनमानी से पहुंचा नौवें पर

पूरा मामला मेडिकल लैब टेक्नोलाजिस्ट भर्ती से जुड़ा हुआ है। रायपुर के रहने वाले मोहम्मद हाशिम ने स्वास्थ्य विभाग की इस भर्ती में हिस्सा लिया था। उन्होंने कोरोना काल के दौरान छह महीने से अधिक समय तक अपनी सेवाएं दी थीं, जिसके एवज में राजनांदगांव के सीएमएचओ यानी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने उन्हें एक अनुभव प्रमाण पत्र जारी किया था। इस सर्टिफिकेट के आधार पर जब शुरुआती मेरिट लिस्ट बनी, तो हाशिम को 80.84 अंक मिले और वह पूरे राज्य में पहले नंबर पर थे। लेकिन अंतिम चयन सूची जारी करते समय विभाग ने अचानक नया नियम अड़ा दिया कि उन्हें मूल नियुक्ति आदेश भी दिखाना होगा। यह दस्तावेज न होने का हवाला देकर उनके 10 बोनस अंक काट दिए गए, जिससे वह सीधे नौवें स्थान पर खिसक गए।

हाईकोर्ट ने अंतिम चयन सूची को किया निरस्त, 40 दिन में पदस्थापना के निर्देश

इस नाइंसाफी के खिलाफ मोहम्मद हाशिम ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस बिभू दत्त गुरु की एकलपीठ ने याचिकाकर्ता के अधिकारों की रक्षा की। कोर्ट ने स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी अंतिम चयन सूची और उससे जुड़ी नियुक्तियों को उस सीमा तक निरस्त कर दिया है जहां तक हाशिम के अधिकार प्रभावित हो रहे थे। अदालत ने विभाग को आदेश दिया है कि मोहम्मद हाशिम के 10 बोनस अंक दोबारा जोड़े जाएं और उनकी मेरिट का पुनर्मूल्यांकन यानी नंबरों की दोबारा जांच की जाए। अगर वह चयन के दायरे में आते हैं, तो उन्हें 40 दिनों के अंदर जॉइनिंग लेटर और पदस्थापना आदेश जारी किया जाए। इस फैसले से उन तमाम युवाओं को बड़ी राहत मिली है जो विभागों की मनमानी का शिकार होते हैं।

Chaiपुर
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