Lakhpati Didi Success Story: दोना-पत्तल से शुरुआत कर कांति साहू बनीं ‘लखपति दीदी’, एक साथ 4 बिजनेस संभालकर बस्तर की महिलाओं के लिए बनीं मिसाल

बैकुंठपुर/कोरिया (छत्तीसगढ़)। छत्तीसगढ़ के ग्रामीण इलाकों में स्वयं सहायता समूहों (SHG) से जुड़कर महिलाएं न सिर्फ आर्थिक रूप से मजबूत हो रही हैं, बल्कि सफलता की नई इबारत लिख रही हैं। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के तहत चल रहा ‘लखपति दीदी’ अभियान कोरिया जिले में बड़ा बदलाव ला रहा है। इसकी सबसे अनूठी और जीवंत मिसाल बनी हैं बैकुंठपुर विकासखंड के ग्राम तलवापारा की रहने वाली श्रीमती कांति साहू। कभी पैसों की तंगी से जूझने वाली कांति ने अपनी कड़ी मेहनत के दम पर संघर्षों को मात दी और आज वे एक सफल उद्यमी बनकर ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भरता का पाठ पढ़ा रही हैं।

शारदा समूह से जुड़ाव और 4 लाख का मिला लोन
एक साधारण किसान परिवार से आने वाली कांति साहू हमेशा से खुद का काम शुरू करना चाहती थीं, लेकिन सबसे बड़ी अड़चन पूंजी की कमी थी। करीब तीन साल पहले उनके जीवन में तब बड़ा यू-टर्न आया, जब वे गांव की महिलाओं के साथ मिलकर ‘शारदा महिला स्वयं सहायता समूह’ से जुड़ीं। समूह में आने के बाद उन्हें बचत करना और बिजनेस के गुर सीखने को मिले। इसके बाद बिहान योजना (Bihan Yojana Chhattisgarh) के तहत बैंक लिंकेज, एसवीईपी योजना और मुद्रा लोन के जरिए उन्हें करीब 4 लाख रुपये की आर्थिक मदद मिली। इस सरकारी पूंजी ने कांति के सपनों को नई उड़ान दे दी।
एक नहीं, एक साथ शुरू किए चार अलग-अलग बिजनेस
कांति दीदी ने किसी एक काम पर निर्भर रहने के बजाय जोखिम उठाया और अपने बिजनेस में विविधता (Diversification) लाई। उन्होंने मिली हुई पूंजी से एक-एक करके चार अलग-अलग व्यवसायों की नींव रखी। आज वे दोना-पत्तल निर्माण इकाई, धान कृषि बीज केंद्र, मैचिंग सेंटर (कपड़ा व्यवसाय) और सिलाई केंद्र का सफल संचालन कर रही हैं। कांति बताती हैं कि इस पूरे संघर्षपूर्ण सफर में उनके पति महेंद्र साहू हर कदम पर उनके साथ परछाई की तरह खड़े रहे, जिससे शुरुआती चुनौतियों को पार करना काफी आसान हो गया।
सालाना शुद्ध मुनाफा 3 लाख के पार, बनीं ‘लखपति दीदी’
कांति साहू की सूझबूझ का नतीजा है कि आज उनके चारों बिजनेस बेहतरीन मुनाफे के साथ चल रहे हैं। वर्तमान में इन सभी व्यवसायों को मिलाकर हर महीने 1 से 1.5 लाख रुपये तक का टर्नओवर (बिजनेस) हो रहा है। सारे खर्चे काटने के बाद कांति हर महीने 30 से 35 हजार रुपये का शुद्ध मुनाफा (Net Profit) कमा रही हैं। इस तरह उनकी सालाना शुद्ध आय 3 लाख रुपये के पार पहुंच चुकी है, जिससे उन्होंने आधिकारिक तौर पर भारत सरकार की प्रतिष्ठित ‘लखपति दीदी’ (Lakhpati Didi Yojana Chhattisgarh) की श्रेणी में अपनी जगह बना ली है।
गांव की अन्य महिलाओं को दे रही हैं आत्मनिर्भर बनने की सीख
आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर होने के बाद कांति साहू का समाज में मान-सम्मान और आत्मविश्वास दोनों बढ़ा है। अब वे न केवल अपने बच्चों और परिवार की जरूरतों को शान से पूरा कर रही हैं, बल्कि गांव की दूसरी महिलाओं को भी घर की चारदीवारी से बाहर निकलकर स्वरोजगार अपनाने के लिए प्रेरित कर रही हैं। कांति की यह कहानी साबित करती है कि अगर ग्रामीण महिलाओं को सही समय पर सही मार्गदर्शन और वित्तीय सहयोग मिले, तो वे बस्तर और छत्तीसगढ़ के सुदूर अंचलों में महिला सशक्तिकरण (Women Empowerment Chhattisgarh) की सबसे बड़ी रोल मॉडल बन सकती हैं।



