सिलयारी नाबालिग दुष्कर्म मामले में बाल आयोग सख्त, स्वतः संज्ञान लेकर पुलिस से तलब की रिपोर्ट, 15 जून को होगी बड़ी सुनवाई

रायपुर/धरसींवा,: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से सटे धरसींवा थाना क्षेत्र के सिलयारी में एक 13 साल की नाबालिग बच्ची के साथ हुए कथित अपहरण और दुष्कर्म के मामले ने अब तूल पकड़ लिया है। इस पूरे गंभीर घटनाक्रम को छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR Chhattisgarh) ने बेहद गंभीरता से लिया है। आयोग ने इस संवेदनशील मामले पर सीधे स्वतः संज्ञान (Suo Motu) लेते हुए अपनी तरफ से केस दर्ज कर लिया है। बाल आयोग को इस पूरे मामले की जानकारी सोशल मीडिया और समाचार पोर्टलों पर चल रही खबरों के जरिए मिली थी। अब इस मामले की अगली आधिकारिक सुनवाई आने वाली 15 जून 2026 को तय की गई है।
शुरुआत में केस दबाने की थी तैयारी, वीडियो-ऑडियो वायरल होने के बाद सस्पेंड हुआ चौकी प्रभारी
इस पूरे मामले में पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी बड़े गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। मिली जानकारी के मुताबिक शुरुआती जांच के दौरान जब डरी-सहमी नाबालिग पीड़िता ने डर के मारे अपराध होने से साफ इनकार कर दिया था, तो स्थानीय पुलिस इस पूरे मामले को रफा-दफा करने और फाइल बंद करने की तैयारी में जुट गई थी। इसके बाद सोशल मीडिया पर एक वीडियो और ऑडियो तेजी से वायरल हो गया। इस नए सबूत के सामने आने के बाद जब पुलिस ने दोबारा मामले की गहराई से जांच की, तो परतें खुलती चली गईं। पुलिस ने तुरंत एक्शन लेते हुए केस के दो मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। वहीं इस पूरे मामले की तफ्तीश में लापरवाही बरतने और केस को हल्के में लेने के आरोप में संबंधित चौकी प्रभारी (Chouki Incharge) को तुरंत प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया है।
बाल आयोग ने दिए सख्त निर्देश
चूंकि यह पूरा मामला एक नाबालिग बच्ची की सुरक्षा, बाल अधिकारों के हनन और पुलिस जांच की क्वालिटी से जुड़ा है, इसलिए बाल आयोग ने अब इसमें अपने कड़े तेवर दिखाए हैं। बाल अधिकार संरक्षण आयोग अधिनियम 2005 (CPCR Act 2005) की धारा 13 और 14 के तहत अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए आयोग ने रायपुर के जिला बाल संरक्षण अधिकारी (District Child Protection Officer) को कड़े निर्देश जारी किए हैं। आयोग ने कहा है कि अधिकारी तुरंत पीड़ित बच्ची के पास जाएं और उसका दोबारा से एक विस्तृत बयान दर्ज कर पूरी रिपोर्ट सौंपें। इसके साथ ही आयोग ने आदेश दिया है कि 15 जून 2026 को पीड़ित बच्ची को उसके माता-पिता और अभिभावकों के साथ आयोग के दफ्तर में व्यक्तिगत रूप से पेश किया जाए।
पॉक्सो और जेजे एक्ट के तहत होगी समीक्षा
किशोर न्याय अधिनियम यानी जेजे एक्ट (Juvenile Justice Act) के कड़े नियमों का सही तरीके से पालन किया गया है या नहीं। आयोग ने साफ कर दिया है कि बच्चों के अधिकारों और उनकी सुरक्षा के मामले में किसी भी स्तर पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा। अगर जांच में पुलिस या प्रशासन के किसी अन्य अधिकारी की भूमिका संदिग्ध या लापरवाह पाई जाती है, तो उनके खिलाफ भी बेहद सख्त कानूनी और अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश की जाएगी। इस कड़े एक्शन के बाद से ही स्थानीय पुलिस महकमे में हड़कंप मचा हुआ है।



