Chhattisgarh Sand Mining: अवैध रेत उत्खनन पर राज्यपाल रमेन डेका सख्त, वैज्ञानिक खनन और कड़ी निगरानी के निर्देश

रायपुर। छत्तीसगढ़ में नदियों और बड़े नालों में हो रहे अवैध एवं बेतरतीब रेत उत्खनन को लेकर राज्यपाल रमेन डेका ने गहरी चिंता जताई है। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण और जल संसाधनों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए अवैध रेत खनन पर तत्काल और प्रभावी रोक लगाने के निर्देश दिए हैं। राज्यपाल ने कहा कि रेत निर्माण कार्यों और इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट के लिए जरूरी संसाधन है, लेकिन इसका अनियंत्रित दोहन पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा बनता जा रहा है।
लोक भवन में आयोजित एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में राज्यपाल ने खनिज विभाग के सचिव पी. दयानंद के साथ इस विषय पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि प्रदेश में रेत खनन पूरी तरह वैज्ञानिक, सुनियोजित और पारदर्शी तरीके से किया जाए। विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
बैठक के दौरान राज्यपाल ने कहा कि अनियंत्रित रेत उत्खनन से नदियों का प्राकृतिक स्वरूप तेजी से प्रभावित हो रहा है। कई स्थानों पर अत्यधिक खुदाई के कारण नदी तल की संरचना बदल रही है। इससे जलधारण क्षमता कम हो रही है और भू-जल स्तर पर भी नकारात्मक असर पड़ रहा है। नदी किनारों के कटाव, जल स्रोतों के सूखने और जलीय जैव विविधता पर खतरे जैसी समस्याएं भी सामने आ रही हैं।
राज्यपाल रमेन डेका ने प्रभावित क्षेत्रों का वैज्ञानिक अध्ययन कराने के निर्देश भी दिए। उन्होंने सुझाव दिया कि रेत खनन के प्रभाव का आकलन करने और तकनीकी सर्वे के लिए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों की मदद ली जा सकती है। इससे भविष्य की खनन नीति को अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा।
उन्होंने खनिज विभाग को अवैध खनन और परिवहन पर 24 घंटे निगरानी रखने के निर्देश दिए। साथ ही तकनीक आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम विकसित करने और खनन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने पर जोर दिया।
राज्यपाल ने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण सरकार और समाज दोनों की जिम्मेदारी है। यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले वर्षों में जल संकट और पर्यावरणीय चुनौतियां और गंभीर हो सकती हैं।



