पत्थर जैसी त्वचा वाली बच्ची के इलाज में आगे आया बाल आयोग, सहायता राशि की जांच शुरू

रायपुर। छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले की गंभीर बीमारी से जूझ रही एक नाबालिग बच्ची के उपचार को लेकर छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग सक्रिय हो गया है। सोशल मीडिया पर सामने आए मामले और प्राप्त शिकायत के बाद आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा के निर्देश पर जांच शुरू कर दी गई है। साथ ही बच्ची के नाम पर जुटाई गई सहायता राशि को उसके परिवार तक पहुंचाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है।

जानकारी के मुताबिक बीजापुर जिले के नेलसनार क्षेत्र के बेंगोफर पारा, कौरगांव की रहने वाली बच्ची लंबे समय से गंभीर बीमारी से पीड़ित है। बच्ची के इलाज के लिए सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों से आर्थिक सहयोग जुटाया गया था। इसी बीच सहायता राशि के उपयोग और भुगतान को लेकर सवाल उठने के बाद मामला बाल आयोग तक पहुंचा।

आयोग को मिली शिकायत में सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर ब्रजराज रजक और दीपक ध्रुवे द्वारा इलाज के लिए एकत्रित की गई राशि के संबंध में जांच की मांग की गई थी। इसके बाद आयोग ने संबंधित अधिकारियों को पूरे मामले की तथ्यात्मक जांच करने के निर्देश दिए।
प्रारंभिक जांच में सामने आया कि दीपक ध्रुवे ने पहले ही बच्ची के परिवार को 39 हजार रुपये की सहायता दी थी। जांच के दौरान अतिरिक्त 22,400 रुपये भी बच्ची की मां और उसके भाई की मौजूदगी में सौंपे गए। वहीं 5 हजार रुपये बैंक खाते से जुड़ी तकनीकी वजहों के चलते बच्ची के चाचा के खाते में जमा किए गए थे, जिसे बाद में परिवार को दे दिया गया।
जांच के दौरान यह भी पता चला कि ब्रजराज रजक ने बच्ची के इलाज के लिए वीडियो जारी कर अपना QR Code साझा किया था। पूछताछ में यह जानकारी सामने आई कि उनके पास बची 18 हजार रुपये की राशि भी परिवार को सौंप दी गई। अब तक कुल 84,400 रुपये बच्ची के उपचार के लिए उपलब्ध कराए जाने की जानकारी सामने आई है।
बाल आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने स्पष्ट कहा है कि सभी Financial Transactions, Donation Records और Bank Details की बिंदुवार जांच की जाएगी। यदि जांच में किसी प्रकार की गड़बड़ी या अनियमितता सामने आती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
इस कार्रवाई से बच्ची के परिवार को राहत मिली है और इलाज के लिए जुटाई गई सहायता राशि की पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।



