रेप पीड़िता को हाईकोर्ट से राहत, 16 हफ्ते की प्रेग्नेंसी खत्म कराने की मिली अनुमति

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने दुष्कर्म पीड़िता को बड़ी राहत देते हुए गर्भपात कराने की अनुमति दे दी है। कोर्ट ने युवती की याचिका मंजूर करते हुए उसे सिम्स या जिला अस्पताल बिलासपुर में भर्ती कर सुरक्षित मेडिकल प्रक्रिया पूरी कराने का निर्देश दिया है। साथ ही कोर्ट ने भ्रूण का डीएनए सैंपल सुरक्षित रखने के भी आदेश दिए हैं, ताकि भविष्य में जांच और कानूनी प्रक्रिया में इसका इस्तेमाल किया जा सके।
मामले की सुनवाई जस्टिस एनके व्यास की वेकेशन बेंच में हुई। पीड़िता ने कोर्ट में दायर याचिका में कहा था कि वह जबरन बनाए गए शारीरिक संबंध के कारण गर्भवती हुई है। वह इस प्रेग्नेंसी को जारी नहीं रखना चाहती। युवती ने कहा कि आरोपी ने उसकी सहमति के बिना दुष्कर्म किया और अब वह मानसिक और सामाजिक पीड़ा झेल रही है।
याचिका में मेडिकल विशेषज्ञों की टीम गठित करने और जल्द से जल्द गर्भपात प्रक्रिया कराने की मांग की गई थी। इसके बाद हाईकोर्ट ने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी बिलासपुर को निर्देश देकर मेडिकल बोर्ड से पीड़िता की जांच कराई। मेडिकल रिपोर्ट में युवती की गर्भावस्था करीब 14 से 16 हफ्ते बताई गई।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि रेप पीड़िता को यह तय करने का पूरा अधिकार है कि वह गर्भावस्था जारी रखना चाहती है या नहीं। अदालत ने माना कि ऐसे मामलों में महिला की मानसिक स्थिति और गरिमा सबसे महत्वपूर्ण है। कोर्ट ने मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी एक्ट 1971 के प्रावधानों और पूर्व न्यायिक फैसलों का हवाला देते हुए गर्भपात की अनुमति दी।
हाईकोर्ट ने अस्पताल प्रशासन को निर्देश दिया है कि पूरी प्रक्रिया मेडिकल नियमों के तहत सुरक्षित तरीके से की जाए। मामले के बाद महिला अधिकारों और रेप पीड़िताओं के कानूनी अधिकारों को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है।



