PLFS 2025 रिपोर्ट में छत्तीसगढ़ की बेरोजगारी दर राष्ट्रीय औसत से कम, सरकार ने योजनाओं को बताया वजह

भारत सरकार के सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय की ओर से जारी पीरियॉडिक लेबर फोर्स सर्वे यानी PLFS 2025 में छत्तीसगढ़ के लिए राहत भरी तस्वीर सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक राज्य की बेरोजगारी दर 2.3 प्रतिशत दर्ज की गई है, जो राष्ट्रीय औसत से काफी कम बताई जा रही है।

राज्य सरकार ने इसे ग्रामीण अर्थव्यवस्था, रोजगार आधारित योजनाओं और स्वरोजगार को बढ़ावा देने वाली नीतियों का असर बताया है। सरकार का कहना है कि प्रदेश में खेती, वनोपज, कुटीर उद्योग और छोटे व्यवसायों को मजबूत करने पर लगातार काम किया गया है, जिससे रोजगार के अवसर बढ़े हैं।
सरकार के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में स्व-सहायता समूहों को बढ़ावा दिया गया। समर्थन मूल्य पर वनोपज खरीदी और स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन की योजनाओं से युवाओं और महिलाओं को आर्थिक मजबूती मिली है। इसके अलावा कौशल विकास कार्यक्रमों और स्वरोजगार योजनाओं का भी असर देखने को मिला है।
राज्य में नई औद्योगिक नीति के तहत भी कई निवेश प्रस्ताव आए हैं। सरकार का दावा है कि नए उद्योगों की स्थापना से युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर तैयार हो रहे हैं। साथ ही गांवों में आर्थिक गतिविधियां बढ़ने से पलायन में भी कमी आई है।
Vishnu Deo Sai ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य युवाओं, किसानों, महिलाओं और श्रमिकों को आत्मनिर्भर बनाना है। उन्होंने कहा कि सरकार केवल रोजगार के आंकड़े सुधारने पर नहीं बल्कि लोगों को सम्मानजनक आजीविका उपलब्ध कराने पर काम कर रही है।
मुख्यमंत्री ने भरोसा जताया कि रोजगारोन्मुखी योजनाओं और सुशासन के जरिए छत्तीसगढ़ आने वाले समय में देश के तेजी से विकसित होने वाले राज्यों में अपनी मजबूत पहचान बनाएगा।
हालांकि आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि बेरोजगारी दर के साथ रोजगार की गुणवत्ता और स्थायी आय के अवसरों पर भी लगातार काम करने की जरूरत है। फिर भी PLFS 2025 के आंकड़े राज्य के लिए सकारात्मक संकेत माने जा रहे हैं।
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