बालोद में 8 प्राचार्यों के सस्पेंशन पर बवाल, प्रशासन की चुप्पी से बढ़ा विवाद

बालोद। जिले में शिक्षा व्यवस्था को लेकर की गई बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई अब खुद प्रशासन के लिए मुश्किल बनती दिख रही है। जिले के 8 प्राचार्यों को निलंबित किए जाने के बाद मामला गरमा गया है। प्राचार्य संगठन खुलकर विरोध में उतर आया है, जबकि प्रशासन अब पूरे मामले पर चुप्पी साधे हुए है।

जारी आदेश के मुताबिक, शिक्षा में लापरवाही और अनुशासनहीनता के आरोप में 8 प्राचार्यों को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड किया गया। वहीं 14 अन्य शिक्षकों और प्राचार्यों की वेतन वृद्धि रोक दी गई। कार्रवाई के बाद शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया।
सोमवार को नाराज प्राचार्य और संगठन के पदाधिकारी कलेक्ट्रेट पहुंचे। यहां पहले उन्हें कलेक्टर से मिलने से रोके जाने का आरोप लगा। इस दौरान जिला शिक्षा अधिकारी मधुलिका तिवारी को भी प्राचार्य संगठन के पदाधिकारियों ने जमकर खरी-खोटी सुनाई। संगठन के जिला संयोजक लोकेश कुमार साहू ने चेतावनी दी कि यदि फैसला वापस नहीं लिया गया तो आंदोलन किया जाएगा।
मामले में सबसे ज्यादा चर्चा प्रशासन की चुप्पी को लेकर हो रही है। कलेक्टर दिव्या मिश्रा ने कार्रवाई पर कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। वहीं जिला शिक्षा अधिकारी ने भी कुछ भी बोलने से मना कर दिया। इससे विवाद और बढ़ गया है।
छत्तीसगढ़ प्राचार्य एसोसिएशन के पदाधिकारी भी अब खुलकर मैदान में आ गए हैं। संगठन के पदाधिकारी एम.आर. खान ने कहा कि बिना ठोस जांच के प्राचार्यों को दोषी ठहराया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या प्रशासन ने रिजल्ट और स्कूलों की वास्तविक स्थिति का अध्ययन किया था या नहीं।
कलेक्टर से मुलाकात के बाद प्राचार्यों ने बातचीत को सकारात्मक बताया, लेकिन फिलहाल प्रशासन की ओर से कोई स्पष्ट रुख सामने नहीं आया है। जिले में यह मामला अब शिक्षा व्यवस्था से ज्यादा प्रशासनिक फैसले पर उठते सवालों को लेकर चर्चा में है।



