एलपीजी गैस गबन कांड: डेढ़ करोड़ की गैस चोरी में खाद्य अधिकारी, भाजपा नेता के दामाद समेत 3 पर केस

महासमुंद
छत्तीसगढ़ के महासमुंद में एलपीजी गैस गबन मामले ने प्रशासनिक भ्रष्टाचार और कारोबारी गठजोड़ की बड़ी परतें खोल दी हैं। करीब डेढ़ करोड़ रुपये की गैस चोरी, फर्जी दस्तावेज तैयार करने और शासन को आर्थिक नुकसान पहुंचाने के आरोप में पुलिस ने तत्कालीन खाद्य अधिकारी अजय यादव, गौरव गैस एजेंसी संचालक पंकज चंद्राकर और रायपुर के कारोबारी मनीष चौधरी के खिलाफ गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया है। पंकज चंद्राकर भाजपा नेता और पूर्व राज्यमंत्री पूनम चंद्राकर के दामाद बताए जा रहे हैं।
पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि जब्त किए गए छह एलपीजी कैप्सूलों में मौजूद करीब 92 मीट्रिक टन गैस को चोरी-छिपे निकालकर बेच दिया गया। बाद में पूरे मामले को वैध दिखाने के लिए फर्जी पंचनामा तैयार किया गया। पुलिस इसे सुनियोजित आर्थिक अपराध और बड़े भ्रष्टाचार का मामला मान रही है।
एसपी प्रभात कुमार के मुताबिक, 24 दिसंबर 2025 को जब्त किए गए छह गैस कैप्सूल सिंघोड़ा थाना परिसर में रखे गए थे। 26 मार्च 2026 को गैस की मात्रा जांचने पहुंचे अधिकारियों को कैप्सूलों में करीब 105 मीट्रिक टन गैस मिली, जिसके बाद कथित साजिश रची गई।
जांच में सामने आया कि 80 लाख रुपये में गैस बेचने की डील तय हुई। आरोप है कि रकम का बड़ा हिस्सा खाद्य अधिकारी को पहुंचाया गया। गैस को एक सप्ताह तक धीरे-धीरे खाली कर अलग-अलग स्थानों पर सप्लाई किया गया। रायपुर और आसपास के इलाकों में कच्चे चालान के जरिए गैस बेचे जाने के भी सबूत मिले हैं।
पुलिस के अनुसार, पूरे मामले को छिपाने के लिए फर्जी पंचनामा बनाया गया, जिसमें आरोपियों को ही स्वतंत्र गवाह दिखाया गया। दस्तावेजों में समय और प्रक्रिया में भी गंभीर गड़बड़ियां मिली हैं।
मामले में धोखाधड़ी, फर्जी दस्तावेज तैयार करने, आपराधिक षड्यंत्र और शासन को आर्थिक नुकसान पहुंचाने समेत कई धाराओं में अपराध दर्ज किया गया है। पुलिस ने संकेत दिए हैं कि जांच में आगे और बड़े खुलासे हो सकते हैं।



