छत्तीसगढ़ में शिक्षा का नया सवेरा: साय सरकार के डिजिटल सुशासन से बच्चों के सुनहरे भविष्य की राह आसान

रायपुर. छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में शिक्षा के अधिकार को डिजिटल सुशासन के जरिए जमीन पर उतारा जा रहा है। अब निजी स्कूलों की आरक्षित सीटों पर प्रवेश के लिए आवेदन से लेकर चयन तक की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन और ऑटोमेटिक हो गई है जिससे मानवीय हस्तक्षेप और सिफारिश की गुंजाइश पूरी तरह समाप्त हो चुकी है। शैक्षणिक सत्र 2026-27 में हजारों बच्चों का चयन कंप्यूटर आधारित रैंडमाइज्ड लॉटरी के माध्यम से किया गया है जो लोकतांत्रिक व्यवस्था में निष्पक्षता और समान अवसर की गारंटी बन रहा है। इस तकनीक ने न केवल भ्रष्टाचार को रोका है बल्कि आम नागरिकों का सरकारी व्यवस्था पर भरोसा भी बहाल किया है।
लाखों बच्चों को लाभ और भविष्य के लिए डिजिटल पहचान
राज्य में वर्तमान में 3 लाख 63 हजार से अधिक विद्यार्थी इस योजना से लाभान्वित हो रहे हैं और सरकार ने शुल्क प्रतिपूर्ति के लिए 300 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया है। डिजिटल सत्यापन प्रणाली से दस्तावेजों की जांच सटीक और त्रुटिरहित हो गई है जिससे पात्र बच्चों को प्राथमिकता मिल रही है। शिक्षा प्रणाली को और अधिक आधुनिक बनाने के लिए छात्रों को अपार आईडी जैसी विशिष्ट पहचान दी जा रही है जो उनके शैक्षणिक रिकॉर्ड को सुरक्षित रखेगी। मुख्यमंत्री की इस दूरदर्शी पहल से ग्रामीण और दूरस्थ इलाकों तक शिक्षा का उजाला पहुंच रहा है और आर्थिक अभाव अब किसी बच्चे की प्रगति में बाधा नहीं बन पाएगा।
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