बाल अधिकार संरक्षण आयोग की सख्ती से बच्चे को मिला न्याय, स्कूल ने लौटाई फीस

रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की कड़ी कार्रवाई के चलते एक जरूरतमंद बच्चे को 10 माह बाद न्याय मिला है। आयोग के हस्तक्षेप के बाद शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम के तहत बच्चे को न केवल निःशुल्क प्रवेश दिलाया गया, बल्कि स्कूल प्रबंधन से उसकी जमा की गई पूरी फीस भी वापस करवाई गई।
मामले के अनुसार, एक अभिभावक ने आरटीई के तहत आरक्षित सीट पर आवेदन किया था और प्रथम चरण की लॉटरी में बच्चे का चयन भी हो गया था। हालांकि, जानकारी के अभाव और स्कूल प्रबंधन व नोडल अधिकारी के बीच समन्वय की कमी के कारण अभिभावक को 16 हजार रुपये जमा कर प्रवेश लेना पड़ा था। शिकायत मिलने पर आयोग ने शिक्षा विभाग को पोर्टल पुनः खोलने और बच्चे का नाम निःशुल्क सीट में दर्ज करने के निर्देश दिए।
आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा की मौजूदगी में स्कूल प्रबंधन ने अभिभावक को 16 हजार रुपये का चेक वापस किया। इस अवसर पर डॉ. शर्मा ने स्पष्ट किया कि बच्चों के शिक्षा के अधिकारों से किसी भी प्रकार का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि पात्र बच्चों को निःशुल्क शिक्षा उपलब्ध कराना स्कूलों की जिम्मेदारी है और इसमें लापरवाही बरतने वाले संस्थानों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।




