शिक्षा विभाग में 218 करोड़ की कथित अनियमितता, दो कर्मचारियों को निलंबित किया

कबीरधाम। जिले के शिक्षा विभाग से जुड़े करीब 218 करोड़ रुपये के वित्तीय लेन-देन में कथित अनियमितता के मामले में दो कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। तत्कालीन कार्यालय में पदस्थ वर्ग-2 कर्मचारी माया कसार और योगेंद्र कश्यप को निलंबित कर दिया गया है। निलंबन अवधि में दोनों को जीवन निर्वाह भत्ता मिलेगा।
ऑडिट रिपोर्ट में वर्ष 2022 से 2025 के बीच कोषालय से निकाले गए लगभग 218 करोड़ रुपये के लेन-देन में गंभीर खामियां सामने आई हैं। रिपोर्ट के अनुसार इस अवधि में कैश बुक, वाउचर और बिल रजिस्टर गायब पाए गए। इस आधार पर तत्कालीन ब्लॉक शिक्षा अधिकारी संजय जायसवाल पर बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितता का आरोप लगा है।
पूर्व बीईओ संजय जायसवाल ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि उनके कार्यकाल में शिक्षकों का वेतन समय पर भुगतान किया गया और सभी वित्तीय दस्तावेज 11 दिसंबर 2025 को वर्तमान ब्लॉक शिक्षा अधिकारी को सौंप दिए गए थे, जिसकी रसीद उनके पास सुरक्षित है। उन्होंने बताया कि उनका कार्यकाल अक्टूबर 2022 से सितंबर 2025 तक रहा। इस दौरान कक्ष प्रभारी योगेंद्र कश्यप को मौखिक और लिखित निर्देश दिए गए, लेकिन दस्तावेजों का ठीक से संधारण नहीं किया गया। लापरवाही के कारण कई अभिलेख अधूरे रह गए। कक्ष प्रभारी को नोटिस भी जारी किया गया था, लेकिन उस पर गंभीरता से ध्यान नहीं दिया गया। जायसवाल ने दावा किया कि उनके कार्यकाल में कोई गबन नहीं हुआ और सभी लेन-देन के साक्ष्य उनके पास मौजूद हैं। स्थानांतरण के समय उन्होंने पूरी जानकारी तत्कालीन अधिकारी को दे दी थी।
जिला शिक्षा अधिकारी एफ.आर. वर्मा ने ऑडिट रिपोर्ट में कुछ कमियों की बात कही है। विभाग ने मामले की जांच तेज कर दी है और अनियमितता के दोषियों के खिलाफ आगे की कार्रवाई की जा रही है।



