बीजापुर के अंदरूनी गांवों में बदलाव की बयार: नियद नेल्लानार योजना और मनरेगा से मिला हजारों परिवारों को रोजगार

बीजापुर। लंबे समय तक नक्सल प्रभाव के कारण विकास की मुख्यधारा से कटे रहे बीजापुर जिले के अंदरूनी क्षेत्रों में अब सकारात्मक परिवर्तन नजर आ रहा है। नियद नेल्लानार योजना और मनरेगा के साझा प्रयासों से उन गांवों तक बुनियादी सुविधाएं पहुंच रही हैं, जहां दशकों से इनकी कमी थी। अब इन क्षेत्रों में रोजगार, आवास, पेयजल और शिक्षा का तेजी से विस्तार हो रहा है।
सोलह हजार से अधिक परिवारों को मिला काम
बीजापुर जिले के 224 गांवों में इस पहल के माध्यम से स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन को गति मिली है। अब तक इन क्षेत्रों में 16,671 जॉब कार्ड पंजीकृत किए गए हैं। विशेष बात यह है कि मुख्यधारा से जुड़ने वाले 966 आत्मसमर्पित नक्सलियों और 650 से अधिक नक्सल पीड़ित परिवारों को भी मनरेगा से जोड़कर स्थायी आजीविका प्रदान की गई है।
विकास कार्यों से पलायन में आई कमी
मनरेगा के तहत इन क्षेत्रों में 1,744 विकास कार्य कराए गए हैं, जिससे 5 लाख से अधिक मानव दिवस सृजित हुए। इन कार्यों से न केवल ग्रामीणों को अपने गांव में ही रोजगार मिला, बल्कि शहर की ओर होने वाले पलायन में भी भारी कमी आई है। इसके साथ ही 372 आजीविका डबरी निर्माण के जरिए मछली पालन और सब्जी उत्पादन जैसी गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा रहा है।
पक्के आवास और बुनियादी सुविधाओं का विस्तार
प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत जिले में 2,977 हितग्राहियों को पक्के मकानों की स्वीकृति दी गई है, जिनमें से 690 आवास बनकर तैयार हो चुके हैं। दुर्गम क्षेत्रों में पेयजल की समस्या दूर करने के लिए कुओं का निर्माण किया गया है। ग्राम कावड़गांव जैसे इलाकों में, जहां 50 वर्षों से सुविधाओं का अभाव था, अब बिजली, सड़क, स्कूल और मोबाइल टॉवर जैसी सुविधाएं पहुंच चुकी हैं। इसके अलावा आंगनबाड़ी भवनों और उचित मूल्य की दुकानों के निर्माण से बच्चों को पोषण और ग्रामीणों को गांव में ही राशन मिलना शुरू हो गया है।
बस्तर में समृद्धि की नई राह: मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस बदलाव पर खुशी जाहिर करते हुए कहा कि जिन गांवों तक पहले विकास नहीं पहुंचा था, वहां आज नई उम्मीद का संचार हुआ है। उन्होंने कहा कि जब बुनियादी सुविधाएं अंतिम व्यक्ति तक पहुंचती हैं, तभी स्थायी शांति और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है। संवेदनशील नीतियों और समन्वित प्रयासों से बीजापुर के चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में आ रहा यह बदलाव विकसित छत्तीसगढ़ की दिशा में एक मजबूत कदम है।



