ट्रंप का ‘पावर डोज’: विदेशी ब्रांडेड दवाओं पर लगेगा 100% टैक्स, जानें भारत के लिए क्यों आई राहत की खबर?

नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ब्रांडेड दवाओं के आयात पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने का आदेश दिया है। हालांकि, कम कीमत वाली जेनेरिक दवाओं को इस फैसले से बाहर रखा गया है। इस कारण भारत पर इसका तत्काल प्रभाव सीमित माना जा रहा है, क्योंकि अमेरिका को होने वाले भारत के दवा निर्यात में जेनेरिक दवाओं की हिस्सेदारी सबसे अधिक है।
यह फैसला ऐसे समय लिया गया है जब अमेरिकी प्रशासन अपनी नई व्यापार नीति को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। यह आदेश सेक्शन 232 के तहत की गई उस जांच पर आधारित है, जिसमें विदेशी दवा आपूर्ति पर निर्भरता को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जोखिम बताया गया था।
रिपोर्ट के अनुसार, इन टैरिफ को अगस्त और सितंबर 2026 के बीच लागू किए जाने की संभावना है। इससे पहले 120 से 180 दिनों का संक्रमण काल दिया जाएगा। जो कंपनियां अपनी दवाओं की कीमतें कम करेंगी या उत्पादन अमेरिका में स्थानांतरित करेंगी, उन्हें 10 से 20 प्रतिशत तक रियायत मिल सकती है। अन्य कंपनियों को 100 प्रतिशत टैरिफ का सामना करना पड़ सकता है।
इन टैरिफ का सबसे अधिक असर आयरलैंड, जर्मनी, स्विट्जरलैंड, बेल्जियम, डेनमार्क, यूनाइटेड किंगडम और जापान जैसे देशों पर पड़ने की संभावना है, जो अमेरिका को महंगी और पेटेंट आधारित दवाओं का निर्यात करते हैं। यह आदेश उन देशों पर भी लागू होगा जिनके अमेरिका के साथ व्यापारिक समझौते हैं।
जेनेरिक दवाओं को फिलहाल इस टैरिफ से बाहर रखा गया है, जो अमेरिका में इस्तेमाल होने वाली कुल दवाओं का 90 प्रतिशत से अधिक हिस्सा हैं। यह छूट करीब एक साल तक जारी रह सकती है, ताकि दवाओं की कमी और कीमतों में बढ़ोतरी को रोका जा सके।
भारत के लिए इसका प्रभाव फिलहाल सीमित है। वर्ष 2025 में भारत ने अमेरिका को 9.7 अरब डॉलर की दवाओं का निर्यात किया, जिसमें लगभग 90 प्रतिशत जेनेरिक दवाएं थीं। हालांकि, ब्रांडेड दवाएं बनाने वाली या पेटेंट दवाओं के लिए कच्चा माल सप्लाई करने वाली भारतीय कंपनियों पर इसका असर पड़ सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिका इस टैरिफ का उपयोग दबाव बनाने के साधन के रूप में कर रहा है, ताकि दवा कंपनियां कीमतें कम करें, उत्पादन अमेरिका में बढ़ाएं और सप्लाई चेन पर नियंत्रण मजबूत किया जा सके।



