“उनके पास कोई देश ही नहीं बचेगा…” ईरान को ट्रंप की आखिरी चेतावनी! 453 किलो यूरेनियम के लिए छिड़ने वाला है महायुद्ध?

वाशिंगटन, 30 मार्च 2026। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान में एक जोखिम भरे सैन्य अभियान पर विचार कर रहे हैं। खुफिया अधिकारियों के अनुसार, ट्रंप इस बात का मूल्यांकन कर रहे हैं कि क्या अमेरिकी सेना को ईरान भेजकर 453.5 किलोग्राम एनरिच्ड यूरेनियम पर कब्जा किया जाए। यह वही यूरेनियम है जिसके लिए ईरान लंबे समय से जंग लड़ रहा है और अपने शीर्ष नेताओं को खो चुका है।
वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार, यदि इस मिशन को मंजूरी मिलती है तो अमेरिकी सैनिक कई दिनों तक ईरान की धरती पर रहेंगे। यह कदम मौजूदा संघर्ष में बड़ी तेजी ला सकता है। अधिकारियों ने बताया कि अभी कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है, लेकिन ट्रंप इस विकल्प पर सकारात्मक रुख रखते हैं क्योंकि यह उनके उद्देश्य के अनुरूप है कि ईरान कभी परमाणु हथियार विकसित न कर पाए।
कूटनीतिक विकल्प भी तलाश रहे ट्रंप
राष्ट्रपति ट्रंप ने एक कूटनीतिक विकल्प पर भी जोर दिया है और सलाहकारों से कहा है कि ईरान पर दबाव डाला जाए कि वह युद्ध खत्म करने के लिए बड़े समझौते के तहत यह सामग्री सौंप दे। उन्होंने निजी बातचीत में स्पष्ट किया है कि ईरान यह सामग्री अपने पास नहीं रख सकता। रविवार रात ट्रंप ने कड़ा अल्टीमेटम देते हुए कहा, “ईरान को अमेरिका की मांगें माननी ही होंगी, वरना उनके पास कोई देश ही नहीं बचेगा। वे हमें वह न्यूक्लियर डस्ट सौंप देंगे।”
कहां रखा है ईरान का यूरेनियम
पिछले साल जून में अमेरिका और इजरायल के हवाई हमलों से पहले माना जाता था कि ईरान के पास 60 प्रतिशत तक संवर्धित यूरेनियम 400 किलोग्राम से अधिक और 20 प्रतिशत फिजन मैटेरियल लगभग 200 किलोग्राम था। आईएईए के प्रमुख राफेल ग्रॉसी के अनुसार यह भंडार इस्फहान की भूमिगत सुरंग और नतान्ज संयंत्र में केंद्रित है। विशेषज्ञों का कहना है कि जरूरत पड़ने पर ईरान नए भूमिगत संवर्धन केंद्र स्थापित कर सकता है।
कितना कठिन होगा यह अभियान
सैन्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यूरेनियम पर कब्जे का कोई भी प्रयास हाल के वर्षों में अमेरिका के सबसे जटिल अभियानों में से एक होगा। अमेरिकी सेना को शत्रु क्षेत्र में प्रवेश करना होगा, जहां ईरानी हवाई सुरक्षा, ड्रोन और मिसाइलों से खतरा होगा। जमीन पर पहुंचने के बाद सैनिक उस क्षेत्र को सुरक्षित करेंगे, जबकि विशेष टीमें मलबे और बारूदी सुरंगों से बचते हुए यूरेनियम की तलाश करेंगी।
माना जाता है कि यह यूरेनियम 40 से 50 सिलेंडरों में रखा है। अमेरिकी सेना को इसे सुरक्षित उपकरणों में ले जाना होगा, जिसके लिए कई गाड़ियों की जरूरत पड़ सकती है। यूएस सेंट्रल कमांड के पूर्व कमांडर जोसेफ वोटेल ने कहा, “यह कोई ऐसा काम नहीं है जो झटपट हो जाए।” जमीनी हालात के आधार पर इस मिशन में कई दिन या एक सप्ताह भी लग सकता है।
खूनी जंग का अंदेशा
एनरिच्ड यूरेनियम ईरान की अस्तित्व की सवाल है। जानकारों ने चेतावनी दी है कि इस तरह के किसी अभियान से ईरान की ओर से जवाबी कार्रवाई हो सकती है, जो संघर्ष को चार से छह सप्ताह की समयसीमा से आगे खींच सकता है। प्रशासन के कुछ लोग लंबे युद्ध से बचना चाहते हैं, खासकर जब मध्यावधि चुनाव नजदीक हैं और देश में राजनीतिक दबाव बढ़ रहा है।
जारी हैं सैन्य तैयारियां
क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सेनाएं कई स्थितियों से निपटने की तैयारी कर रही हैं। अधिकारियों ने बताया कि इन विकल्पों में अतिरिक्त सैनिकों की तैनाती, मरीन की रैपिड रिस्पॉन्स यूनिट और 82वीं एयरबोर्न डिवीजन के पैराट्रूपर्स को सक्रिय करना शामिल है। पेंटागन जमीन पर लड़ने वाले 10 हजार अतिरिक्त सैनिकों को भेजने पर भी विचार कर रहा है।
रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने इस महीने की शुरुआत में संकेत दिया था कि वाशिंगटन बातचीत से हल निकालने को प्राथमिकता देता है, लेकिन सैन्य विकल्प भी मौजूद हैं।
कूटनीतिक रास्ता अब भी खुला
शांतिपूर्ण समाधान अब भी संभव है। अमेरिका ने 1994 में कजाकिस्तान और 1998 में जॉर्जिया से एनरिच्ड यूरेनियम हटाने की प्रक्रिया की देखरेख की है। अधिकारियों का कहना है कि इस तरह की व्यवस्था से जमीन पर जोखिम भरे सैन्य अभियान की जरूरत खत्म हो जाएगी। फिलहाल फैसला ट्रंप के हाथ में है, जबकि सैन्य योजनाकार उस अभियान की तैयारी में जुटे हैं जो इस संघर्ष का सबसे बड़ा टर्निंग प्वाइंट बन सकता है।


