ग्राम पंचायत चुनाव के बाद 500 आवारा कुत्तों की हत्या, 7 सरपंचों पर एफआईआर

नई दिल्ली/हैदराबाद। देश में आवारा कुत्तों को सड़कों से हटाकर शेल्टर होम भेजने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई जारी है। इसी बीच तेलंगाना से एक गंभीर और चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां ग्राम पंचायत चुनाव के बाद बड़े पैमाने पर आवारा कुत्तों की हत्या किए जाने के आरोप लगे हैं। बीते एक सप्ताह में राज्य के अलग-अलग जिलों के गांवों में करीब 500 आवारा कुत्तों के मारे जाने की जानकारी सामने आई है।
पुलिस के अनुसार, इन घटनाओं में पंचायत प्रतिनिधियों की संलिप्तता पाई गई है। मामले में अब तक दो महिला सरपंचों सहित कुल सात सरपंचों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।
ताजा मामला कामारेड्डी जिले का है। यहां पालवंचा मंडल के भवानीपेट, पालवंचा, फरीदपेट, वाड़ी और बंदारामेश्वरपल्ली गांवों में बीते दो-तीन दिनों के भीतर करीब 200 आवारा कुत्तों की हत्या किए जाने का आरोप है। इस मामले में पुलिस ने पांच सरपंचों सहित छह लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है।
इससे पहले हनमकोंडा जिले के श्यामपेट और अरेपल्ली गांवों में 6 से 9 जनवरी के बीच लगभग 300 आवारा कुत्तों की हत्या का मामला सामने आया था। उस प्रकरण में दो महिला सरपंचों और उनके पतियों सहित नौ लोगों के खिलाफ पुलिस ने मामला दर्ज किया था।
सूत्रों के मुताबिक, दिसंबर में हुए ग्राम पंचायत चुनाव के दौरान कुछ उम्मीदवारों ने आवारा कुत्तों और बंदरों की समस्या से निजात दिलाने का वादा किया था। आरोप है कि चुनाव जीतने के बाद इन वादों को पूरा करने के लिए कुत्तों की हत्या कराई गई। एनिमल वेलफेयर एक्टिविस्ट अदुलापुरम गौथम ने मछारेड्डी पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराते हुए बताया कि भवानीपेट गांव में कुत्तों के शव मिले, जिसके बाद आसपास के अन्य गांवों में भी इसी तरह की घटनाओं की पुष्टि हुई।
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में आवारा कुत्तों से जुड़े मामलों पर चिंता जताते हुए डॉग-बाइट की घटनाओं में राज्यों से भारी मुआवजा दिलाने और कुत्तों को खाना खिलाने वालों की जिम्मेदारी तय करने पर विचार करने की बात कही है। साथ ही, बीते पांच वर्षों में आवारा जानवरों से संबंधित नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन न होने पर भी कोर्ट ने नाराजगी जाहिर की है।



