जांजगीर-चांपा जिले में मिड-डे मील से 25 बच्चे फूड प्वाइजनिंग के शिकार, हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब

बिलासपुर। जांजगीर-चांपा जिले के नवागढ़ विकासखंड स्थित शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला चौरभाठा में मध्यान्ह भोजन करने के बाद 25 बच्चे फूड प्वाइजनिंग का शिकार हो गए। भोजन के तुरंत बाद बच्चों को उल्टी और दस्त की शिकायत हुई। उच्च न्यायालय ने इस लापरवाही को संज्ञान में लेते हुए स्कूल शिक्षा विभाग से जवाब तलब किया था।
सरकार की ओर से प्रस्तुत जवाब में बताया गया कि प्रधानपाठक को निलंबित कर दिया गया है। साथ ही निर्देश जारी किए गए हैं कि मध्यान्ह भोजन बिना चखे और गुणवत्ता जांच के बच्चों को नहीं परोसा जाएगा।
घटना की जानकारी के अनुसार राहत स्वसहायता समूह द्वारा स्कूल में खीर-पूड़ी परोसी गई थी। नियमों के तहत भोजन परोसने से पूर्व शिक्षकों द्वारा उसकी गुणवत्ता जांच अनिवार्य है, किंतु बिना जांच के भोजन बच्चों को परोस दिया गया। भोजन ग्रहण करने के कुछ समय पश्चात बच्चों की तबीयत बिगड़ने लगी। स्थिति गंभीर होने पर शिक्षकों और अभिभावकों ने बच्चों को नवागढ़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया, जहां चार बच्चों की हालत नाजुक बताई जा रही है।
शासन ने जवाब में कहा कि मिड-डे मील नियम 2015 के अंतर्गत भोजन की गुणवत्ता जांच की प्रक्रिया निर्धारित है। लोक शिक्षण संचालनालय ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को इस संबंध में निर्देशित किया है। मिड-डे मील वितरण में सावधानी बरती जा रही है ताकि भविष्य में ऐसी घटना दोहराई न जाए।
न्यायालय ने सरकार को अगली सुनवाई से पूर्व शपथ पत्र दाखिल करने का निर्देश दिया है, जिसमें बीमार बच्चों के स्वास्थ्य की प्रगति की जानकारी दी जानी है। मामले की अगली सुनवाई 21 जनवरी को होगी।



