मुख्यधारा में लौटे नक्सलियों का संवर रहा भविष्य, चौगेल पुनर्वास केंद्र में प्रशिक्षण के बाद मिला रोजगार

रायपुर: छत्तीसगढ़ सरकार की नक्सल पुनर्वास नीति के तहत बस्तर क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहे हैं। जिन हाथों ने कभी हिंसा का रास्ता अपनाकर बंदूकें थामी थीं, वे अब आजीविकामूलक गतिविधियों से जुड़कर समाज की मुख्यधारा में सम्मानजनक जीवन व्यतीत कर रहे हैं। कांकेर जिले के भानुप्रतापपुर स्थित ग्राम चौगेल के पुनर्वास केंद्र में आत्मसमर्पित नक्सलियों को विभिन्न व्यवसायों का प्रशिक्षण देकर उनके हुनर को निखारा जा रहा है।
कलेक्टर निलेशकुमार महादेव क्षीरसागर के मार्गदर्शन में जिला प्रशासन द्वारा आत्मसमर्पित माओवादियों को काष्ठ शिल्प, इलेक्ट्रिशियन, ड्राइविंग, सिलाई और राजमिस्त्री जैसे पाठ्यक्रमों में दक्ष बनाया जा रहा है। वर्तमान में पुनर्वास केंद्र में प्रशिक्षित युवक-युवतियां लकड़ी के नेम प्लेट, सजावटी सामग्री, थैले और अन्य कार्यालयीन सामग्री तैयार कर रहे हैं। यह केंद्र, जो कभी सुरक्षा बलों का कैंप हुआ करता था, अब कौशल विकास के गढ़ के रूप में अपनी पहचान बना चुका है। यहां प्रशिक्षण के साथ-साथ शिक्षा और स्वास्थ्य पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

उत्तर बस्तर कांकेर जिला प्रशिक्षण के उपरांत आत्मसमर्पित नक्सलियों और नक्सल पीड़ितों को निजी क्षेत्र में रोजगार उपलब्ध कराने वाला प्रदेश का पहला जिला बन गया है। हाल ही में कलेक्टर ने तीन नक्सल पीड़ितों और एक आत्मसमर्पित नक्सली को निजी फर्मों के नियुक्ति पत्र सौंपे हैं। इन युवाओं को 15 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय पर असिस्टेंट इलेक्ट्रिशियन के रूप में नियुक्त किया गया है।

पुनर्वास केंद्र में स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए कृषि, मत्स्य पालन, उद्यानिकी और पशुधन विकास विभागों के समन्वय से कार्यशालाएं भी आयोजित की जा रही हैं। मुख्यधारा में लौटे युवाओं के लिए मनोरंजन और नियमित स्वास्थ्य परीक्षण की भी समुचित व्यवस्था की गई है। रोजगार मिलने पर खुशी जाहिर करते हुए हितग्राहियों ने कहा कि जिला प्रशासन के इस सार्थक प्रयास से उन्हें नया जीवन और समाज में गरिमा के साथ जीने का अवसर मिला है।



