दिल्ली हाईकोर्ट का निर्देश : छठे वेतन आयोग के नाम पर वसूली गई अतिरिक्त फीस का रिफंड पूर्व छात्रों को मिले

नई दिल्ली। दिल्ली के निजी स्कूलों द्वारा 2006 से 2010 के बीच छठे वेतन आयोग लागू करने के नाम पर 40 से 400 प्रतिशत तक बढ़ाई गई फीस के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने शिक्षा निदेशालय (DoE) को महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने DoE को ऐसा तंत्र विकसित करने को कहा है, जिससे 15-20 साल पहले संबंधित स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों की पहचान की जा सके और उन्हें अतिरिक्त फीस का रिफंड मिल सके।
चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तुषार राव गेडेला की पीठ ने स्कूलों की दलील सुनी कि पुराने रिकॉर्ड उपलब्ध न होने से छात्रों का विवरण निकालना कठिन है। कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट रजिस्ट्री में जमा लगभग 500 करोड़ रुपये (ब्याज सहित अब 1,200 करोड़ से अधिक) वास्तविक हकदारों को लौटाने की व्यवस्था की जाए। कुल रिफंड राशि 1,200 करोड़ रुपये से अधिक आंकी गई है।
इस मामले की जांच के लिए गठित अनिल देव सिंह कमेटी ने 1,200 से अधिक स्कूलों के खातों की पड़ताल की थी, जिसमें 99 प्रतिशत स्कूलों में वित्तीय अनियमितताएं पाई गईं। कमेटी ने स्कूलों को अतिरिक्त फीस लौटाने के निर्देश दिए थे। इसके खिलाफ 220 स्कूलों की याचिका पर कोर्ट ने 2014 में 75 प्रतिशत राशि रजिस्ट्री में जमा कराने का आदेश दिया था।
कोर्ट के निर्देश के बाद गैर सरकारी संगठन जस्टिस फॉर ऑल ने वकील खगेश बी. झा और शिखा शर्मा बग्गा के नेतृत्व में ‘फीस रिफंड’ अभियान शुरू किया है। वॉट्सऐप ग्रुप के माध्यम से प्रभावित अभिभावकों से संपर्क कर जानकारी एकत्र की जा रही है। मामले में अगली सुनवाई 17 जनवरी को होगी।



