दूरस्थ वनांचलो तक पहुंचा आयोग, फोस्टर बच्चों का जाना हाल, नक्सल प्रभावित क्षेत्र के बच्चों का सपना सेना में जाने की चाह

जगदलपुर। छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने आज जगदलपुर प्रवास के दौरान फोस्टर केयर व्यवस्था का प्रत्यक्ष निरीक्षण करते हुए सुरक्षित पारिवारिक वातावरण में पल रहे बच्चों से स्वयं मुलाकात और बात की। उल्लेखनीय है कि आयोग की अध्यक्ष डॉ वर्णिका शर्मा ने मुंबई जैसे महानगरों में आयोजित फोस्टर केयर संबंधी कार्यशालाओं में सक्रिय सहभागिता निभाते हुए अपने महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं ।
फोस्टर केयर का आशय है जब कोई बच्चा अपने माता-पिता के साथ नहीं रह पाता, तब उसे कुछ समय के लिए वैकल्पिक परिवार में सुरक्षित वातावरण में रखा जाता है, जहां उसकी देखभाल, शिक्षा एवं समग्र विकास सुनिश्चित किया जाता है।
अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने जगदलपुर के बाबूसेरा एवं कलचा जैसे दूरस्थ गांवों में फोस्टर परिवारों से भेंट कर बच्चों हालचाल जाना और उनसे स्वयं बात की जिसमें शिक्षा, स्वास्थ्य, खेलकूद एवं व्यक्तिगत रुचियों से जुड़े विषयों पर संवाद किया। निरीक्षण के दौरान यह पाया गया कि फोस्टर केयर का क्रियान्वयन संतोषजनक रूप से किया जा रहा है।
विशेष रूप से, नक्सल प्रभावित क्षेत्र के एक ही परिवार के तीन बालकों, जो वर्तमान में फोस्टर केयर में रह रहे हैं, ने भविष्य में भारतीय सेना में सेवा देने की इच्छा व्यक्त की। वहीं एक अन्य बालिका, जो पूर्व में दुर्ग बालिका गृह एवं राजनांदगांव में फोस्टर देखरेख में रही, वर्तमान में कलचा के परिवार के साथ निवासरत है। बालिका विगत एक वर्ष से परिवार में पूर्णतः समाहित होकर स्थानीय भाषा ‘भतरी’ एवं ‘हलबी’ सीख चुकी है तथा संस्कृत विषय में विशेष रुचि रखती है। बच्चों की शिक्षा से एक विशेष बात सामने आई कि फोस्टर के समय बच्चों के शैक्षणिक सत्र का ध्यान रखते हुए बच्चों को फोस्टर किया जाए और आगमी दिनों में आयोग द्वारा इसके लिए अनुशंसा भी जारी की जाएगी।
इसके साथ ही जगदलपुर स्थित सर्किट हाउस में विभागीय अधिकारियों के साथ बैठक भी आयोजित की गई जिसमें बच्चों के लिए खेल सुविधाओं, स्टेडियम निर्माण, स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने पर विस्तृत चर्चा की गई। बैठक में जिला कार्यक्रम अधिकारी, जिला बाल संरक्षण अधिकारी, बाल कल्याण समिति के सदस्य तथा यूनिसेफ के प्रतिनिधि एवं सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
नक्सल प्रभावित क्षेत्र में फोस्टर केयर आगे चल के काफी प्रभावी रहेगा और आयोग द्वारा फोस्टर केयर व्यवस्था को और अधिक प्रभावी एवं संवेदनशील बनाने हेतु निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि प्रत्येक बालक को सुरक्षित, सम्मानजनक एवं स्नेहमय पारिवारिक वातावरण प्राप्त हो सके।




