छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने होटल कारोबारी को अवैध गिरफ्तारी पर 1 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया

बिलासपुर : छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने दुर्ग जिले के भिलाई में एक होटल कारोबारी के साथ पुलिस की कथित बर्बरता और अवैध गिरफ्तारी पर सख्त टिप्पणी की है। कोर्ट ने राज्य सरकार को याचिकाकर्ता को एक लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है। साथ ही कहा है कि सरकार जांच के बाद इस राशि की वसूली दोषी पुलिसकर्मियों से कर सकती है।
हाईकोर्ट ने गृह विभाग के सचिव को निर्देश दिया है कि पुलिस बल को मानवाधिकारों के प्रति संवेदनशील बनाया जाए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों।
याचिकाकर्ता भिलाई के अवंतीबाई चौक निवासी आकाश कुमार साहू लॉ स्टूडेंट हैं तथा परिवार की आजीविका के लिए कोहका में होटल संचालित करते हैं। उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर पुलिस की कार्रवाई को अवैध बताया था।
याचिका में कहा गया कि आकाश विधिवत पंजीकृत और लाइसेंस प्राप्त होटल चला रहे थे। 8 सितंबर 2025 को पुलिस अधिकारी और जवान होटल पहुंचे। उन्होंने ठहरे लोगों से पूछताछ का बहाना बनाकर रजिस्टर और पहचान पत्रों की जांच की। बिना महिला पुलिस के एक कमरे में जबरन घुसे जहां पुरुष और महिला ठहरे थे। उन्हें बाहर निकाला गया तथा मैनेजर के साथ दुर्व्यवहार किया।
कुछ समय बाद पुलिस फिर पहुंची और होटल कर्मचारियों पर सोने के आभूषण चोरी का झूठा आरोप लगाया। कर्मचारियों ने सीसीटीवी कैमरों की जानकारी दी लेकिन पुलिस ने जांच के बजाय कमरों की तलाशी ली तथा मैनेजर की कथित तौर पर बेरहमी से पिटाई की। इसके बाद होटल मालिक आकाश को बुलाया गया।
आकाश ने पहुंचकर खुद को मालिक बताने पर पुलिस ने गाली-गलौज और दुर्व्यवहार किया। विरोध पर उन्हें जबरन हिरासत में लेकर थाने ले जाया गया जहां मारपीट की गई। बाद में बिना वैध कारण के गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया।
पुलिस का दावा था कि एक गुमशुदा लड़की की तलाश में होटल पहुंचे थे। आकाश ने सरकारी काम में बाधा डाली, वाहन की चाबी छीनी और ड्राइवर से हाथापाई की जिससे शांति भंग का खतरा पैदा हुआ। इसी आधार पर बीएनएस की धारा 170 के तहत हिरासत में लिया गया।
हाईकोर्ट ने सुनवाई में पाया कि याचिकाकर्ता के खिलाफ किसी संज्ञेय अपराध में एफआईआर दर्ज नहीं थी। महज संदेह पर जेल भेजना असंवैधानिक है। हिरासत में मानसिक तनाव और अपमान अनुच्छेद 21 का उल्लंघन है। गिरफ्तारी के समय लिखित कारण बताना अनिवार्य था लेकिन आकाश ने गिरफ्तारी मेमो पर लिखा कि उन्हें मामले की जानकारी नहीं है।
कोर्ट ने एसडीएम की भूमिका पर भी नाराजगी जताई कि उन्होंने पुलिस रिपोर्ट पर बिना विचार मुहर लगा दी।
हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता के खिलाफ सभी आपराधिक कार्रवाई और पुलिस की शिकायत निरस्त कर दी है। राज्य सरकार को चार सप्ताह में एक लाख रुपये भुगतान करने का आदेश दिया है। देरी पर नौ प्रतिशत वार्षिक ब्याज लगेगा।
चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने कहा कि पुलिस के अवैध कार्य और अत्याचार आपराधिक न्याय प्रणाली में जनता के विश्वास को कमजोर करते हैं।



