स्थानांतरित शिक्षकों की वरिष्ठता पर शिक्षक संघ का ज्ञापन, प्रथम नियुक्ति तिथि से गणना की मांग

रायपुर। छत्तीसगढ़ में स्थानांतरित शिक्षकों की वरिष्ठता को लेकर जारी विवाद के बीच छत्तीसगढ़ राज्य स्तरीय शिक्षक संघ ने शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों को ज्ञापन सौंपकर प्रथम नियुक्ति तिथि से वरिष्ठता गणना करने की मांग की है। संघ के प्रांताध्यक्ष अनिल कुमार टोप्पो के नेतृत्व में संचालक लोक शिक्षण संचालनालय रायपुर एवं उपसचिव, शिक्षा मंत्रालय को ज्ञापन दिया गया। इसमें हालिया हाईकोर्ट के आदेशों के पालन और वरिष्ठता से वंचित शिक्षकों को न्याय दिलाने की मांग रखी गई है।
शिक्षक संघ का कहना है कि उच्च न्यायालय के फैसलों से प्रभावित शिक्षकों को राहत की उम्मीद थी, लेकिन मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले के जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा उच्च कार्यालय से मार्गदर्शन लिए बिना ही अभ्यावेदन खारिज कर दिए गए, जिससे शिक्षकों में निराशा और असमंजस की स्थिति उत्पन्न हो गई है। संघ ने उच्च न्यायालय के केस क्रमांक 1681/2023 के आदेश के सख्त पालन की मांग की है।
संघ के अनुसार संविलियन से पहले पंचायत संवर्ग के सहायक शिक्षक, शिक्षक पंचायत एवं व्याख्याता पंचायत के स्थानांतरण के बाद वरिष्ठता की गणना प्रथम नियुक्ति तिथि के स्थान पर कार्यभार ग्रहण तिथि से की जाती रही, जिसके कारण 1998, 2005, 2006 सहित विभिन्न वर्षों में नियुक्त कई शिक्षक पदोन्नति से वंचित रह गए। संविलियन के बाद भी नियमों के विपरीत वरिष्ठता सूची तैयार की गई, जिससे हजारों कनिष्ठ शिक्षकों को वरिष्ठ मानते हुए पदोन्नति दे दी गई।
इसी क्रम में शिक्षक एलबी संवर्ग से व्याख्याता पदोन्नति हेतु जारी वरिष्ठता सूची में प्राथमिक शाला प्रधान पाठकों को शामिल नहीं किए जाने पर प्रभावित शिक्षकों ने हाईकोर्ट का रुख किया। सुनवाई के बाद माननीय उच्च न्यायालय ने स्थानांतरित प्रधान पाठकों एवं शिक्षक एलबी संवर्ग की वरिष्ठता प्रथम नियुक्ति तिथि से गणना करने का स्पष्ट आदेश दिया है। इस फैसले से प्रदेश के 27 हजार से अधिक शिक्षक एलबी संवर्ग में खुशी का माहौल है।
शिक्षक संघ का कहना है कि इस निर्णय से वर्षों से स्थानांतरण के कारण पदोन्नति से वंचित शिक्षक लाभान्वित होंगे, साथ ही विवाह के बाद स्थानांतरण कराने वाली महिला शिक्षिकाओं को भी न्याय मिला है। ज्ञापन सौंपने के दौरान शालेय शिक्षक संघ और संयुक्त शिक्षक संघ के पदाधिकारी भी उपस्थित रहे। संघ ने संबंधित जिला शिक्षा अधिकारी पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग करते हुए चेतावनी दी है कि भविष्य में बिना उच्च कार्यालय के मार्गदर्शन के अभ्यावेदन खारिज किए गए तो मामले को पुनः उच्च न्यायालय में चुनौती दी जाएगी।



