रायपुर: छत्तीसगढ़ के सरकारी कॉलेजों में प्रोफेसरों के 760 पदों में अधिकांश रिक्त, 2021 की 595 प्रोफेसर भर्ती पांच साल बाद भी अधर में

रायपुर। राज्य के सरकारी कॉलेजों में उच्च शिक्षा के स्तर सुधारने के दावे कागजी साबित हो रहे हैं। प्रदेश के 335 शासकीय महाविद्यालयों में प्रोफेसरों की भारी कमी बनी हुई है। स्वीकृत 760 पदों में से अधिकांश रिक्त पड़े हैं, जिससे हजारों छात्रों की शिक्षा प्रभावित हो रही है।
सबसे बड़ी विडंबना यह है कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में वर्ष 2021 में शुरू की गई 595 प्रोफेसरों की सीधी भर्ती प्रक्रिया पांच वर्ष बीत जाने के बाद भी पूरी नहीं हो पाई है। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (सीजीपीएससी) और उच्च शिक्षा विभाग के बीच समन्वय की कमी के कारण यह प्रक्रिया लंबित है।
सीजीपीएससी के अधिकारियों के अनुसार, आयोग ने उच्च शिक्षा विभाग को लगातार तकनीकी सहयोग के लिए पत्र भेजे हैं। लिखित परीक्षा के बाद कुछ अभ्यर्थियों द्वारा तकनीकी विषयों और नियमों पर आपत्तियां दर्ज की गईं, जिनके निराकरण के लिए विभाग से अभिमत (टेक्निकल ओपिनियन) मांगा गया था। हालांकि, उच्च शिक्षा विभाग की ओर से आवश्यक सहयोग नहीं मिलने के कारण यह मामला फाइलों में दबा हुआ है।
28 नवंबर को उच्च शिक्षा मंत्री टंकराम वर्मा ने भी भर्ती प्रक्रिया में तेजी लाने और आपत्तियों के त्वरित निपटारे के निर्देश दिए थे, लेकिन धरातल पर कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है।
सीजीपीएससी ने लिखित परीक्षा के आधार पर कुल 1,533 अभ्यर्थियों को दस्तावेज सत्यापन के लिए चयनित किया था। दस्तावेज सत्यापन पूर्ण हुए चार माह से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन अब तक इंटरव्यू के लिए कोई बुलावा नहीं जारी हुआ है। अभ्यर्थी असमंजस की स्थिति में हैं कि आखिर चयन प्रक्रिया कब पूरी होगी।
सबसे अधिक रिक्तियां राजनीति शास्त्र में 75 पदों पर हैं। इसके बाद हिंदी में 66 पद, भौतिक शास्त्र में 60 पद और कामर्स में 57 पद रिक्त हैं। यह स्थिति राज्य के सरकारी कॉलेजों में शिक्षण कार्य और छात्रों की शिक्षा गुणवत्ता पर गंभीर प्रभाव डाल रही है।



