शराब दुकान में करोड़ों की व्यवस्था पर सवाल! सरकारी गल्ले से 3.70 लाख लेकर फरार हुआ सुपरवाइजर, पीछे छोड़ गया रहस्यमयी लेटर…
रायपुर। राजधानी रायपुर की सरकारी शराब दुकानों में अनियमितताओं और विवादों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। अब कादरचौक स्थित विदेशी मदिरा दुकान से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने आबकारी विभाग और शराब संचालन व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जानकारी के मुताबिक दुकान का सुपरवाइजर सूरज निर्मलकर सरकारी गल्ले से करीब 3 लाख 70 हजार रुपये लेकर फरार हो गया है।
बताया जा रहा है कि फरार होने से पहले सूरज निर्मलकर दुकान में एक लेटर छोड़ गया, जिसमें पैसों का पूरा हिसाब-किताब लिखा हुआ है। हालांकि इस पूरे मामले को और भी रहस्यमयी बनाता है यह तथ्य कि लेटर पर किसी प्रकार के हस्ताक्षर नहीं हैं। ऐसे में यह सवाल भी उठ रहा है कि आखिर यह पत्र किसने लिखा और इसके पीछे की वास्तविक कहानी क्या है?

मामले की जानकारी मिलते ही आबकारी विभाग में हड़कंप मच गया। विभागीय अधिकारी, संबंधित कंपनी के कर्मचारी और अन्य जिम्मेदार अधिकारी मौके पर पहुंचे तथा दुकान के कर्मचारियों से पूछताछ शुरू कर दी गई है। फिलहाल फरार सुपरवाइजर की तलाश की जा रही है और विभाग पूरे घटनाक्रम की जांच में जुटा हुआ है।
पहले भी विवादों में रह चुकी है यह दुकान...
गौरतलब है कि कादरचौक स्थित यह शराब दुकान पहले भी अनियमितताओं को लेकर सुर्खियों में रह चुकी है। इससे पहले भी यहां की व्यवस्थाओं को लेकर सवाल उठे थे, जिसके बाद आबकारी अधिकारी वैभव मित्तल ने कार्रवाई करते हुए तत्कालीन सुपरवाइजर का तबादला शास्त्री मार्केट शराब दुकान में किया था। वहीं शास्त्री मार्केट में पदस्थ सूरज निर्मलकर को कादरचौक शराब दुकान की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।
अब सूरज निर्मलकर के कथित रूप से लाखों रुपये लेकर फरार होने की घटना ने न केवल विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि शराब दुकानों में वित्तीय निगरानी और जवाबदेही को लेकर भी नई बहस छेड़ दी है।
बड़े सवाल...
- सरकारी गल्ले से लाखों रुपये निकालना आखिर कैसे संभव हुआ?
- क्या दुकान में वित्तीय निगरानी व्यवस्था कमजोर है?
- क्या यह अकेले सुपरवाइजर का मामला है या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क काम कर रहा है?
- बिना हस्ताक्षर वाले लेटर की सच्चाई क्या है?
फिलहाल पूरे मामले की जांच जारी है और आबकारी विभाग की अगली कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।



