छत्तीसगढ़ में मधुमक्खी पालन को बढ़ावा, जशपुर के किसानों को मिल रही आर्थिक सहायता और अनुदान

रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार किसानों की आय बढ़ाने और उन्हें स्वरोजगार के नए अवसरों से जोड़ने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। इसी कड़ी में राष्ट्रीय बागवानी मिशन और राज्य योजना के तहत प्रदेश में मधुमक्खी पालन को प्रोत्साहित किया जा रहा है। जशपुर जिले में इस योजना के अंतर्गत 20 किसानों को संसाधनों की खरीद के लिए आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है।
योजना के तहत लाभार्थियों को मधुमक्खी पेटी और कॉलोनी के लिए 1600 रुपये, छत्ते के लिए 800 रुपये तथा शहद निकालने वाली मशीन के लिए 8000 रुपये का अनुदान दिया जा रहा है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में कम लागत में अतिरिक्त आय के स्रोत विकसित करना है।
विशेषज्ञों का कहना है कि मधुमक्खियां न केवल शहद उत्पादन में सहायक हैं, बल्कि परागण के जरिए फसलों की पैदावार बढ़ाने में भी बड़ी भूमिका निभाती हैं। सरसों, आम, लीची, सूरजमुखी और विभिन्न सब्जियों की खेती में मधुमक्खियों के कारण उत्पादन में काफी वृद्धि होती है, जिससे खेती अधिक लाभकारी हो जाती है।
मधुमक्खी पालन ग्रामीण युवाओं और महिलाओं के लिए स्वरोजगार का एक सशक्त माध्यम बनकर उभर रहा है। शहद के साथ-साथ मोम और रॉयल जेली जैसे उत्पादों की बाजार में भारी मांग है। प्रशिक्षण प्राप्त कर कोई भी व्यक्ति इस व्यवसाय को आसानी से शुरू कर सकता है।
आर्थिक लाभ के साथ-साथ यह पर्यावरण संरक्षण के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। मधुमक्खियां जैव विविधता को बनाए रखने में मदद करती हैं। कम निवेश में अधिक मुनाफा देने वाला यह व्यवसाय ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में अहम योगदान दे रहा है। सरकार की इस पहल से किसान अब वैज्ञानिक तरीके और उचित प्रबंधन के जरिए बेहतर उत्पादन और अधिक आय प्राप्त कर रहे हैं।



