प्रसाद योजना के तहत डोंगरगढ़ बम्लेश्वरी मंदिर विकास कार्यों में भ्रष्टाचार और लापरवाही के आरोप, अधिकांश परियोजनाएं अधूरी

डोंगरगढ़। मां बम्लेश्वरी देवी मंदिर के विकास के लिए केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी प्रसाद योजना भ्रष्टाचार, घटिया निर्माण तथा प्रशासनिक उदासीनता के गंभीर आरोपों में घिर गई है। वर्ष 2021 में केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय द्वारा 48.44 करोड़ रुपये की स्वीकृति मिलने के बावजूद चार वर्ष बीतने पर भी परियोजना का अधिकांश हिस्सा अधूरा है तथा किए गए कार्य गुणवत्ता के मानकों पर खरे नहीं उतर रहे।
बीते दो सप्ताह पहले श्री यंत्र लोकार्पण से पूर्व निर्माणाधीन स्लैब गिरने की घटना ने परियोजना में व्याप्त अनियमितताओं को उजागर किया है। यह हादसा तकनीकी चूक के साथ-साथ निर्माण में गंभीर लापरवाही तथा भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है।
प्रसाद योजना के तहत तीन अलग-अलग स्थलों पर 36 से अधिक विकास कार्य प्रस्तावित थे, जिनमें तीर्थ सुविधाएं, यात्री प्रतीक्षालय, सीढ़ियों का उन्नयन, स्वच्छता प्रबंधन, ऊर्जा व्यवस्था तथा सुरक्षा इंतजाम शामिल थे। चार वर्ष बाद भी कोई कार्य पूर्णता प्रमाण पत्र प्राप्त नहीं कर सका। अधिकांश राशि खर्च दिखाने के बावजूद कार्य अधूरे रहने से गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
नए रोपवे पर स्थापित सौर ऊर्जा संयंत्र चार वर्ष बाद भी चालू नहीं हो सका है। ट्रस्ट तथा ठेकेदार के बीच ऑफग्रिड तथा ऑनग्रिड सिस्टम को लेकर विवाद बना हुआ है। ट्रस्ट द्वारा बार-बार ऑनग्रिड सिस्टम की मांग तथा पर्यटन मंडल को पत्राचार के बावजूद ठेकेदार द्वारा मनमाने निर्णय थोपने से करोड़ों की यह परियोजना अनुपयोगी पड़ी है।
श्रद्धालुओं से निकलने वाले प्लास्टिक, भोजन अवशेष तथा अन्य कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन के लिए ठोस अपशिष्ट प्रबंधन प्रणाली स्थापित की जानी थी, जिसमें कचरे का पृथक्करण, संग्रह, प्रसंस्करण तथा सुरक्षित निपटान शामिल था। यह संपूर्ण सिस्टम आज भी पार्किंग क्षेत्र में निष्क्रिय पड़ा है।



