उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता का एक वर्ष पूरा, सरकार ने संशोधनों के साथ सख्त किए नियम

देहरादून। उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू हुए एक साल पूरा हो गया है। राज्य सरकार ने 27 जनवरी को यूसीसी दिवस के रूप में मनाया। इस अवसर पर सरकार ने कानून में महत्वपूर्ण संशोधन करते हुए नए प्रावधानों को तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया है। राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (रिटा.) गुरमीत सिंह की मंजूरी के बाद उत्तराखंड समान नागरिक संहिता (संशोधन) अध्यादेश 2026 जारी कर दिया गया है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने यूसीसी की पहली वर्षगांठ पर इसके प्रभावों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि बीते एक साल में राज्य में हलाला, बहुविवाह और तीन तलाक का एक भी मामला सामने नहीं आया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि भविष्य में ऐसे मामले मिलते हैं, तो उन पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। आंकड़ों के अनुसार, यूसीसी लागू होने के बाद विवाह पंजीकरण की संख्या में भारी उछाल आया है। पहले जहां प्रतिदिन औसतन 67 पंजीकरण होते थे, अब यह संख्या बढ़कर 1400 प्रतिदिन तक पहुंच गई है।
नए संशोधन अध्यादेश के तहत कानून में दो बड़े बदलाव किए गए हैं। पहले बदलाव के अनुसार, अब विवाह में अपनी पहचान छिपाकर धोखाधड़ी करने वालों के खिलाफ कठोर सजा का प्रावधान जोड़ा गया है। दूसरा महत्वपूर्ण बदलाव पंजीकरण को लेकर है, जिसके तहत वर्ष 2010 से 26 जनवरी 2025 के बीच विवाह करने वाले सभी दंपतियों के लिए पंजीकरण कराना अनिवार्य कर दिया गया है। सरकार इस अध्यादेश को आगामी बजट सत्र में विधेयक के रूप में विधानसभा में पेश करेगी।
उल्लेखनीय है कि 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने यूसीसी लागू करने का संकल्प लिया था। विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों के बाद 7 फरवरी 2024 को इसे विधानसभा से पारित किया गया और 11 मार्च 2024 को राष्ट्रपति की मंजूरी मिली। अंततः 27 जनवरी 2025 को उत्तराखंड यूसीसी लागू करने वाला देश का पहला राज्य बना था। मुख्यमंत्री ने विपक्ष की आलोचनाओं पर पलटवार करते हुए कहा कि संकल्प को सिद्धि तक पहुंचाकर सरकार ने महिला सशक्तिकरण और समानता की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाया है।



