गांवों के विकास को नई रफ्तार: आईआईटी और आईआईएम से ट्रेनिंग लेकर पंचायत प्रतिनिधि संवार रहे ग्रामीण बुनियादी ढांचा

भोपाल। मध्यप्रदेश में पंचायती राज संस्थाओं को मजबूत बनाने की दिशा में लगातार प्रगति हो रही है। पंचायत प्रोत्साहन योजना के तहत 14 जिलों ने बेहतर प्रदर्शन किया है। राज्य में 9 लाख से अधिक पदाधिकारियों को उच्च स्तरीय प्रशिक्षण दिया गया है, जबकि 16,773 परियोजना कार्य पूरे किए जा चुके हैं।
भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, उज्जैन, नरसिंहपुर, सागर, छतरपुर, सीधी, पूर्वी निमाड़, हरदा, नीमच, गुना और झाबुआ जिलों की पंचायतों ने योजना में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। ग्राम पंचायत विकास योजना के तहत केंद्रीय वित्त आयोग के अनुदानों का उपयोग करते हुए प्रदेश की पंचायतों में बड़े स्तर पर विकास कार्य किए गए हैं।
राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान के तहत निर्वाचित प्रतिनिधियों और पदाधिकारियों की क्षमता बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। इसके अंतर्गत ग्राम पंचायत भवन निर्माण, कम्प्यूटरीकरण और अन्य अधोसंरचनात्मक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
वित्त आयोग के अनुदान दो हिस्सों में दिए जाते हैं। इनमें 40 प्रतिशत अनटाइड अनुदान है, जिसका उपयोग स्थानीय जरूरतों के अनुसार विकास कार्यों में किया जा सकता है। वहीं 60 प्रतिशत टाइड अनुदान बुनियादी सुविधाओं जैसे स्वच्छता, कचरा प्रबंधन, पेयजल और वर्षा जल संचयन के लिए निर्धारित है।
प्रदेश में 9 लाख से अधिक जनप्रतिनिधियों और पदाधिकारियों को भारतीय प्रबंधन संस्थान, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान और ग्रामीण प्रबंधन संस्थान आनंद जैसे संस्थानों के सहयोग से प्रशिक्षण दिया गया है। इसका उद्देश्य नेतृत्व, निर्णय क्षमता, वित्तीय प्रबंधन और विवाद समाधान जैसे कौशल विकसित करना है। अब तक 3,275 प्रतिभागियों को ओएसआर मॉड्यूल का प्रशिक्षण भी दिया जा चुका है।
पंचायतों में ई-गवर्नेंस को बढ़ावा देने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित किए गए हैं। ईग्रामस्वराज ऐप के माध्यम से योजना, लेखांकन, निगरानी और भुगतान की प्रक्रिया को ऑनलाइन किया गया है। वित्त वर्ष 2025-26 में प्रदेश की 23,011 ग्राम पंचायतों में से 22,978 पंचायतों ने अपनी विकास योजनाएं इस पोर्टल पर अपलोड की हैं। साथ ही 21,950 पंचायतों ने ईग्रामस्वराज-पीएफएमएस इंटरफेस के जरिए 2156.10 करोड़ रुपये का भुगतान किया है।



