राजनीति के चाणक्य कहे जाने वाले मुकुल रॉय नहीं रहे, 71 वर्ष की उम्र में हुआ निधन

नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय रेल मंत्री मुकुल रॉय का 23 फरवरी की सुबह कोलकाता में कार्डियक अरेस्ट से निधन हो गया। उन्होंने 71 वर्ष की उम्र में साल्ट लेक स्थित अपोलो अस्पताल में रात करीब 1.30 बजे अंतिम सांस ली।
रॉय को ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस के प्रमुख रणनीतिकारों में गिना जाता था। उनके लंबे राजनीतिक जीवन में मंत्री पद, दल बदल और कानूनी विवादों के कई दौर शामिल रहे।
स्वास्थ्य कारणों से सक्रिय राजनीति से दूरी
बीते कुछ वर्षों से खराब स्वास्थ्य के चलते वे सक्रिय राजनीति से दूर हो गए थे। वर्ष 2023 की शुरुआत में चिकित्सकों ने बताया था कि वे डिमेंशिया और पार्किंसंस रोग से पीड़ित थे, जिससे उनकी मानसिक और शारीरिक क्षमता प्रभावित हुई थी।
मार्च 2023 में हाइड्रोसेफेलस के इलाज के लिए उनकी ब्रेन सर्जरी हुई थी। इस बीमारी में मस्तिष्क में द्रव जमा होने से दबाव बढ़ जाता है। जुलाई 2024 में घर पर गिरने से सिर में चोट लगने के बाद ब्लड क्लॉट हटाने के लिए सर्जरी की गई, जिसके बाद उनकी स्थिति और कमजोर हो गई। वे लंबे समय से मधुमेह, सांस संबंधी दिक्कत और उच्च रक्त शर्करा की समस्या से भी जूझ रहे थे।
राजनीतिक सफर
मुकुल रॉय तृणमूल कांग्रेस के संस्थापक सदस्यों में रहे और ममता बनर्जी के करीबी सहयोगी माने जाते थे। वर्ष 1998 में पार्टी गठन के बाद संगठन को मजबूत करने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। वे संप्रग-2 सरकार में केंद्रीय रेल मंत्री और जहाजरानी राज्य मंत्री रहे। 2006 में राज्यसभा सदस्य चुने गए और 2009 से 2012 तक सदन में पार्टी के नेता रहे।
लंबे समय तक राज्यसभा सदस्य और पार्टी महासचिव के रूप में वे दिल्ली में पार्टी का प्रमुख चेहरा रहे। वर्ष 2017 में मतभेदों के बाद उन्होंने भाजपा का दामन थामा, जहां उन्हें राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया। बाद में वे फिर से तृणमूल कांग्रेस में लौट आए।



