
कोरबा। छत्तीसगढ़ के घने जंगलों और पहाड़ों में बसे कोरबा जिले से एक प्रेरक कहानी सामने आई है। यह कहानी है पहाड़ी कोरवा जनजाति समाज की श्रीमती मंझनीन बाई की, जिन्हें लोग ‘राष्ट्रपति के दत्तक पुत्री समाज’ की प्रतिनिधि के रूप में जानते हैं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देश पर जिला प्रशासन कोरबा ने डीएमएफ फंड के माध्यम से विशेष पिछड़ी जनजाति के शिक्षित परिवारों को रोजगार से जोड़ने का महत्वपूर्ण कदम उठाया है, जिसका असर अब जीवन के वास्तविक बदलाव के रूप में दिख रहा है।
स्वास्थ्य केंद्र में मिली रोजगार की नई रोशनी...
मंझनीन बाई को ग्राम अज़गरबहार प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के रूप में मानदेय आधार पर नियुक्त किया गया। उनके पति किनारे लाल, जो स्वयं दसवीं पास हैं, को भी इसी योजना के तहत पोड़ी उपरोड़ा ब्लॉक हाई स्कूल, एतमानगर में भृत्य पद मिला। अब दोनों पति-पत्नी आत्मनिर्भर हैं और अपने बच्चों तथा परिवार के लिए एक उज्जवल भविष्य गढ़ रहे हैं।
मंझनीन बाई बताती हैं:
पहले हमारा जीवन बहुत कठिन था। जंगलों में वनोपज पर निर्भर रहना पड़ता था। अब नौकरी मिलने से जीवन में स्थिरता और सम्मान दोनों आए हैं। दो साल से काम कर रही हूँ और अब भविष्य के प्रति विश्वास बढ़ गया है।
पहाड़ी कोरवाओं के लिए प्रेरणा...
कोरबा ब्लॉक के ग्राम टोकाभांटा की मंझनीन बाई का जीवन संघर्षों से भरा रहा। वे ऐसे परिवार में पली-बढ़ीं जहाँ जंगल ही जीवन का सहारा था। शिक्षा के लिए संसाधनों की कमी थी, फिर भी उन्होंने कक्षा दसवीं तक अध्ययन पूरा किया। अब मंझनीन बाई अपने समाज के युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं। उन्होंने साबित कर दिया कि कठिन परिस्थितियों में भी शिक्षा और दृढ़ निश्चय से हर बाधा पार की जा सकती है।

विशेष पिछड़ी जनजाति के परिवारों में उजाला...
प्रशासन के प्रयास से न केवल मंझनीन बाई के परिवार का जीवन सुधरा है, बल्कि स्थानीय पहाड़ी कोरवाओं को भी रोजगार और शिक्षा के महत्व का संदेश मिला है। जिले में कलेक्टर कोरबा के मार्गदर्शन में पीवीटीजी के 43 लोगों को स्वास्थ्य विभाग में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के रूप में डीएमएफ फंड से मानदेय पर नियुक्त किया गया। इसके बाद कई ऐसे परिवारों ने भी अपने बच्चों को स्कूल भेजना शुरू कर दिया है, जिससे समुदाय में शिक्षा और आत्मनिर्भरता की नई किरण जगी है।

आर्थिक सशक्तिकरण का प्रत्यक्ष प्रभाव...
मंझनीन बाई को हर माह 9,000 रुपये मानदेय मिलता है। इससे न केवल उनका जीवन स्तर सुधरा है, बल्कि उनके परिवार की आर्थिक स्थिति भी मजबूत हुई है। रोजगार के साथ अब वे और उनके पति अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं देने में सक्षम हैं।



