छत्तीसगढ़ में मखाना की खेती को मिला बढ़ावा, केंद्र सरकार ने 178 लाख रुपये की योजना को दी मंजूरी

रायपुर। छत्तीसगढ़ के किसान अब पारंपरिक फसलों के स्थान पर नकदी फसलों की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहे हैं। राज्य में मखाना उत्पादन की बढ़ती संभावनाओं को देखते हुए केंद्र सरकार की ‘सेंट्रल सेक्टर स्कीम फॉर डेवलपमेंट ऑफ मखाना’ का क्रियान्वयन शुरू कर दिया गया है। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय मखाना बोर्ड में शामिल करने की घोषणा के बाद राज्य में मखाना उत्पादन और प्रसंस्करण की गतिविधियों ने गति पकड़ ली है।
उद्यानिकी विभाग के अनुसार, वर्ष 2025-26 के लिए इस योजना के तहत छत्तीसगढ़ को 178 लाख 11 हजार रुपये की स्वीकृति मिली है। प्रथम चरण में योजना के क्रियान्वयन के लिए धमतरी, बालोद, महासमुंद और गरियाबंद जिलों का चयन किया गया है। वर्तमान में धमतरी जिले के 43 कृषक और विभिन्न महिला स्व-सहायता समूह मखाना उत्पादन से जुड़ चुके हैं, जहां 55 एकड़ तालाब क्षेत्र में बुवाई का कार्य पूर्ण हो चुका है।
विशेषज्ञों का मानना है कि छत्तीसगढ़ की जलवायु और मिट्टी मखाना उत्पादन के लिए बेहद अनुकूल है। राज्य में पहला मखाना प्रसंस्करण केंद्र दिसंबर 2021 में आरंग के ग्राम लिंगाडीह में स्थापित किया गया था। मखाना की खेती की विशेषता यह है कि यदि किसान कच्चे बीज बेचने के बजाय उन्हें सुखाकर और भूनकर प्रोसेस करने के बाद बाजार में बेचें, तो उन्हें कई गुना अधिक लाभ प्राप्त होता है। एक किलोग्राम मखाना बीज से मिलने वाले पॉप की बाजार में कीमत 700 से 1000 रुपये प्रति किलो तक होती है।
आगामी वर्ष 2026-27 के लिए विभाग ने 2 करोड़ रुपये की नई कार्ययोजना प्रस्तावित की है। इसके अंतर्गत 105 हेक्टेयर अतिरिक्त क्षेत्र में मखाना उत्पादन और 10 नए तालाबों का निर्माण किया जाएगा। इसके साथ ही कृषि विश्वविद्यालयों और विभागीय रोपणियों में उच्च गुणवत्ता वाले बीज उत्पादन का कार्यक्रम भी संचालित किया जाएगा ताकि किसानों को स्थानीय स्तर पर ही उन्नत बीज उपलब्ध हो सकें।



