महासमुंद: बागबाहरा धान संग्रहण केंद्र में 18433 क्विंटल धान गायब, संचालकों ने चूहे, दीमक और चिड़ियों को ठहराया जिम्मेदार, 5.71 करोड़ का नुकसान

महासमुंद। कबीरधाम जिले के बाद अब महासमुंद जिले के बागबाहरा में भी धान संग्रहण केंद्रों में बड़े पैमाने पर धान गायब होने का मामला सामने आया है। बागबाहरा संग्रहण केंद्र के संचालकों ने करीब 18433 क्विंटल धान के गायब होने की जिम्मेदारी चूहों, दीमक और चिड़ियों पर डाल दी है।
संचालकों का दावा है कि इन जीवों ने 10 महीने तक लगातार धान खाया, जिससे प्रतिदिन औसतन 256 किलो धान की क्षति हुई और सरकार को 5.71 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। हालांकि, यह दावा संदेह के घेरे में है, क्योंकि 10 महीने में इतनी बड़ी मात्रा में धान का चूहों-दीमक-चिड़ियों द्वारा खाया जाना अव्यावहारिक माना जा रहा है।
प्रशासन मार्कफेड के माध्यम से धान के उचित रखरखाव के लिए करोड़ों रुपये खर्च करता है, जिसमें परिवहन भाड़ा, हमाली तथा सुरक्षा उपकरण शामिल हैं। इसके बावजूद 3.65 प्रतिशत की कमी सामने आने पर संचालकों ने इसे प्राकृतिक क्षति बता दिया है।
खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के सचिव द्वारा पिछले साल 12 सितंबर को जारी पत्र में स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि स्टॉक में 1 प्रतिशत तक कमी पर कारण बताओ नोटिस, 1 से 2 प्रतिशत कमी पर विभागीय जांच तथा 2 प्रतिशत से अधिक कमी पर तत्काल निलंबन, विभागीय जांच और एफआईआर दर्ज की जाए।
बागबाहरा केंद्र में 3.65 प्रतिशत की कमी के बावजूद अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है और प्रशासन की ओर से गंभीरता नजर नहीं आ रही है।
बागबाहरा धान संग्रहण केंद्र प्रभारी ने बताया कि 2024-25 में 12.63 लाख बोरा धान की आवक हुई थी। आवक के समय धान में 17 प्रतिशत नमी थी, जबकि जावक के समय 10-11 प्रतिशत नमी रही। उन्होंने दावा किया कि संग्रहण केंद्र में दीमक, कीट, पंक्षी और चूहों के कारण धान खराब हुआ। साथ ही बारिश के कीचड़ में धान खराब होने और 10 महीने तक धान रुके रहने के कारण 3.65 प्रतिशत का शॉर्टेज आया।
हाल ही में कबीरधाम जिले के कर्वधा में भी 7 करोड़ रुपये के धान गायब होने का मामला सामने आया था, जहां भी चूहों को जिम्मेदार ठहराया गया था। इन लगातार मामलों से धान संग्रहण व्यवस्था की निगरानी और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।



