मजदूरी छोड़ ‘मल्टी-फार्मिंग’ के नायक बने ललित यादव: 6 गायों से शुरू हुआ सफर, आज 25 पशुओं के साथ रच रहे इतिहास

दंतेवाड़ा के गीदम विकासखंड स्थित गुमड़ा गांव के 36 वर्षीय ललित यादव की कहानी साहस और अटूट मेहनत की मिसाल है। एक दौर ऐसा था जब ललित अपनी आजीविका के लिए दूसरों के खेतों में मजदूरी करने को विवश थे, लेकिन आज वे बस्तर में ‘श्वेत क्रांति’ के बड़े चेहरे बनकर उभरे हैं। साल 2013 में मात्र 6 गायों के साथ पशुपालन की शुरुआत करने वाले ललित के पास आज 25 उन्नत नस्ल की गायों का आधुनिक डेयरी फार्म है। उनके इस वैज्ञानिक दृष्टिकोण ने न केवल उनकी आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ किया है, बल्कि स्थानीय स्तर पर कुपोषण के खिलाफ जंग में भी अहम भूमिका निभाई है।
आधुनिक तकनीक और मल्टी-फार्मिंग मॉडल: आय के बनाए विविध स्रोत
ललित की कामयाबी का राज पारंपरिक खेती के साथ तकनीक का तालमेल है। पशुपालन विभाग के सहयोग से उन्होंने जर्सी और एचएफ क्रॉस जैसी नस्लों को अपनाया, जिससे आज वे प्रतिदिन 70 से 80 लीटर दूध का उत्पादन कर रहे हैं। चारे की लागत कम करने के लिए उन्होंने नेपियर घास की खेती शुरू की, जिससे खर्चों में भारी कटौती हुई है। ललित केवल डेयरी तक सीमित नहीं रहे, बल्कि उन्होंने कुक्कुट पालन, सब्जी उत्पादन और पनीर जैसे मूल्य संवर्धित उत्पादों के जरिए ‘मल्टी-फार्मिंग’ का सफल मॉडल पेश किया है। उनके फार्म की जैविक खाद की मांग इतनी अधिक है कि दूसरे जिलों के किसान ट्रैक्टरों में खाद भरने उनके घर तक पहुँचते हैं। 3 लाख का बैंक ऋण समय से पूर्व चुकाकर ललित ने आज पूरे क्षेत्र के किसानों के लिए प्रेरणा का एक प्रकाश स्तंभ खड़ा कर दिया है।



