विधानसभा में जंबूरी का मुद्दा: टेंडर प्रक्रिया पर उठे सवाल, मंत्री ने कहा- जेम पोर्टल पर भ्रष्टाचार संभव नहीं

रायपुर। बालोद जिले में आयोजित स्काउट गाइड रोवर रेंजर जंबूरी कार्यक्रम को लेकर विधानसभा में विवाद खड़ा हो गया। कांग्रेस विधायक उमेश पटेल ने कार्यक्रम में हुए खर्च, टेंडर प्रक्रिया और संभावित अनियमितताओं को लेकर स्कूल शिक्षा मंत्री से जानकारी मांगी। कांग्रेस ने मामले में भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए विधायकों की समिति से जांच कराने की मांग की। मंत्री के जवाब से असंतुष्ट विपक्ष ने सदन से वॉकआउट कर दिया।
सदन में चर्चा के दौरान उमेश पटेल ने पूछा कि पहले जारी टेंडर को रद्द कर नया टेंडर क्यों जारी किया गया। इस पर स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने बताया कि पहले टेंडर की शर्तें काफी जटिल थीं, जिससे स्थानीय स्तर पर लोग इसमें भाग नहीं ले पा रहे थे। इसलिए टेंडर की शर्तों में बदलाव किया गया। उन्होंने बताया कि भारत स्काउट गाइड की राष्ट्रीय संस्था की सहमति मिलने के बाद आयोजन के लिए 5 करोड़ रुपये दिए गए थे और टेंडर जेम पोर्टल के माध्यम से जारी करने की बात कही गई थी। बाद में आयुक्त ने पत्र लिखकर बताया कि जेम पोर्टल से कुछ खरीदी संभव नहीं है।
उमेश पटेल ने आरोप लगाया कि किसी खास व्यक्ति को लाभ पहुंचाने के लिए टेंडर की शर्तों को कमजोर किया गया, जो भ्रष्टाचार का मामला है। उन्होंने पूछा कि क्या इस मामले की जांच विधायक दल की समिति से कराई जाएगी।
इस दौरान उमेश पटेल ने यह भी सवाल उठाया कि स्काउट गाइड का अध्यक्ष कौन होता है। मंत्री ने बताया कि स्कूल शिक्षा मंत्री पदेन अध्यक्ष होता है। इस पर पटेल ने परिषद को भंग करने के अधिकार को लेकर भी सवाल उठाए।
मंत्री गजेंद्र यादव ने स्पष्ट किया कि टेंडर को सांसद ने नहीं बल्कि जिला प्रशासन ने रद्द किया था और इसके बाद नया टेंडर जारी किया गया। उन्होंने कहा कि पूरा काम जेम पोर्टल के माध्यम से किया गया है और इस प्रक्रिया में भ्रष्टाचार की संभावना नहीं होती, इसलिए जांच की जरूरत नहीं है।
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी इस मुद्दे पर सवाल उठाते हुए कहा कि टेंडर जारी होने से पहले ही काम शुरू कर दिया गया था और यह प्रवृत्ति ठीक नहीं है। उन्होंने मामले की जांच उच्च स्तरीय समिति से कराने की मांग की।
मंत्री गजेंद्र यादव ने सदन को बताया कि बालोद में आयोजित जंबूरी कार्यक्रम के लिए क्रॉसिंग एरिना, शौचालय, जल और प्रकाश व्यवस्था, ध्वनि व्यवस्था, आवास के लिए टेंट और डोम, बैरिकेडिंग, भोजनालय और प्रिंटिंग सहित अन्य व्यवस्थाओं पर करीब 2 करोड़ रुपये खर्च किए गए।
उन्होंने बताया कि जंबूरी से संबंधित कार्यों के लिए मेसर्स अमर भारत किराया भंडार को 5 करोड़ 18 लाख 88 हजार 860 रुपये का टेंडर दिया गया था। टेंडर की शर्तें तय करने के लिए समिति का गठन किया गया था और सरकार को किसी विशेष फर्म को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से टेंडर बदलने की कोई शिकायत प्राप्त नहीं हुई है।



