महिला सशक्तिकरण से महिला नेतृत्व वाले विकास की ओर बढ़ता भारत, सरकारी योजनाओं से बदली तस्वीर

रायपुर: भारत में महिला सशक्तिकरण का उद्देश्य अब केवल कल्याणकारी योजनाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह महिलाओं को आत्मनिर्भर और निर्णायक भूमिका में स्थापित करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न पहलों के माध्यम से महिलाओं की सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक भागीदारी में उल्लेखनीय सुधार देखा जा रहा है। यह बदलाव देश की विकास यात्रा को महिला नेतृत्व वाले विकास की ओर ले जा रहा है।
स्वास्थ्य और पोषण के क्षेत्र में मिशन पोषण 2.0 और प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना जैसी योजनाओं ने बड़े पैमाने पर सुधार सुनिश्चित किए हैं। वर्ष 2017 से अब तक मातृ वंदना योजना के तहत लगभग 4.27 करोड़ महिलाओं को आर्थिक सहायता प्रदान की गई है। वहीं, प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के अंतर्गत 7.26 करोड़ से अधिक गर्भवती महिलाओं की निःशुल्क जांच की गई है। स्वास्थ्य सेवाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से बाल मृत्यु दर और नवजात मृत्यु दर में भी बड़ी कमी दर्ज की गई है।
वित्तीय समावेशन और आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में प्रधानमंत्री जन धन योजना और मुद्रा योजना ने मील का पत्थर साबित होते हुए महिलाओं को सीधे बैंकिंग और ऋण सुविधाओं से जोड़ा है। जन धन योजना के तहत आधे से अधिक खाते महिलाओं के नाम पर हैं। मुद्रा योजना के तहत दिए गए कुल ऋणों में लगभग 68 प्रतिशत हिस्सा महिला उद्यमियों का है। इसके अलावा, लखपति दीदी पहल और नमो ड्रोन दीदी योजना जैसी आधुनिक तकनीकों के माध्यम से महिलाओं को स्वरोजगार के नए अवसरों से जोड़ा जा रहा है।
दैनिक जीवन की गरिमा और सुरक्षा के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना, उज्ज्वला योजना और जल जीवन मिशन ने ग्रामीण क्षेत्रों में व्यापक सकारात्मक प्रभाव डाला है। आवास योजना के तहत करोड़ों घर महिलाओं के नाम आवंटित किए गए हैं, जबकि उज्ज्वला योजना ने 10.5 करोड़ से अधिक परिवारों को धुएँ से मुक्ति दिलाई है। जल जीवन मिशन के माध्यम से घरों तक नल का जल पहुँचने से महिलाओं के दैनिक श्रम में कमी आई है और उनके जीवन स्तर में सुधार हुआ है।
शिक्षा के क्षेत्र में ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ अभियान के सकारात्मक परिणाम स्वरूप जन्म के समय लिंगानुपात में सुधार हुआ है। उच्च शिक्षा और शोध कार्यों में भी महिलाओं का नामांकन बढ़ा है। सुरक्षा के मोर्चे पर मिशन शक्ति के तहत वन स्टॉप सेंटर और महिला हेल्पलाइन जैसी व्यवस्थाओं ने कार्यस्थल और समाज में महिलाओं के लिए सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित किया है। आज महिलाएँ न केवल परिवार की धुरी हैं, बल्कि राष्ट्र की आर्थिक और तकनीकी प्रगति में भी अग्रणी भूमिका निभा रही हैं।



