गरियाबंद में 48 लाख के इनामी 9 नक्सलियों ने किया आत्मसमर्पण, लाल आतंक पर लगातार झटके

गरियाबंद। छत्तीसगढ़ में नक्सली संगठन अब अपनी अंतिम सांसें गिन रहा है। वर्ष 2026 की शुरुआत से ही राज्य में नक्सलियों को लगातार बड़े झटके मिल रहे हैं। इसी क्रम में आज गरियाबंद जिले में 48 लाख रुपये के इनामी 9 नक्सलियों ने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में वापसी की। आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों में 6 महिला और 3 पुरुष शामिल हैं। सरेंडर करने वालों में नक्सली संगठन के बड़े चेहरे कमांडर बलदेव और महिला डीवीसी सदस्य अंजू भी शामिल हैं।
इन सभी ने पुलिस लाइन में चार एके-47, एक इंसास और एक 303 राइफल सहित अन्य हथियार सौंपे। इस दौरान आईजी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर आत्मसमर्पण की पुष्टि की और बताया कि यह कार्रवाई सुरक्षाबलों द्वारा नक्सली संगठन के खिलाफ चलाए जा रहे निरंतर और सफल अभियान का परिणाम है। इस घटना से स्पष्ट है कि नक्सली संगठन धीरे-धीरे कमजोर हो रहा है। राज्य सरकार की मुख्यधारा में वापसी की नीति, स्थानीय सुरक्षा तंत्र और लगातार हो रहे एनकाउंटर ऑपरेशन के कारण कई माओवादी अब हथियार डालकर सामान्य जीवन अपनाने को प्राथमिकता दे रहे हैं।
बीजापुर में मुठभेड़ में 6 माओवादी ढेर, डीवीसीएम दिलीप बेंडजा सहित
इसी कड़ी में बीजापुर जिले के उत्तर-पश्चिम क्षेत्र में थाना भोपालपटनम और थाना फरसेगढ़ के सरहदी जंगल-पहाड़ी इलाके में सुरक्षाबलों और माओवादियों के बीच मुठभेड़ हुई। इस मुठभेड़ में 4 महिला माओवादी सहित कुल 6 माओवादी कैडर मारे गए। मारे गए माओवादियों में नेशनल पार्क एरिया कमेटी का इंचार्ज और शीर्ष माओवादी नेता डीवीसीएम दिलीप बेंडजा भी शामिल था। दिलीप बेंडजा पर सरकार ने 8 लाख रुपये का इनाम घोषित किया हुआ था। यह घटना राज्य में नक्सली गिरोह के लगातार कमजोर पड़ने की ओर इशारा करती है।
सुकमा में 29 नक्सलियों का आत्मसमर्पण
इससे पहले 14 जनवरी को सुकमा जिले में केरलापाल एरिया कमेटी में सक्रिय 29 नक्सलियों ने सरेंडर किया था। लगातार हो रहे आत्मसमर्पण और सुरक्षाबलों की कार्रवाई से नक्सली संगठन की कमर टूटती नजर आ रही है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस अवसर पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट जारी करते हुए नक्सलियों को मुख्यधारा में लौटने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार पुनर्वास, आर्थिक अवसर और सामाजिक सुरक्षा की सुनिश्चित व्यवस्था कर रही है ताकि नक्सली अपने जीवन में सुधार कर सकें और समाज की मुख्यधारा में शामिल हो सकें।



